ईश्वर दास रोहाणी नहीं रहे

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जबलपुर – राजनीती की सबसे पहली पायदान पार्षद से अपनी राजनीती शुरू कर विदानसभा अध्यक्ष के पद पर पहुँचाने वाले महाकोशल में भ्हजपा के सबसे ताकतवर नेता मध्य प्रदेह्स विधान सभा के अध्यक्ष इश्वर दास रोहणी का दिल का दौरा पड़ने से अचानक अवसान हो गया वे 67 साल के थे। रोहाणी इसी महीने होने वाले विधान सभा चुनावो की तैयारी के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विचार-विमर्श कर रणनीति तैयार कर रहे थे उसी दौरान उन्होंने घबराहट की शिकायत की। उन्हें 11 बजकर 30 मिनट पर जबलपुर हॉस्पिटल ले जाया गया।ट्रीटमेंट के दौरान ही उनका निधन हो गया।रोहाणी कैंट विधानसभा क्षेत्र से लगातार चार बार चुनाव जीत चुके थे। इस बार भी बीजेपी ने 31 अक्टूबर को जारी 147 उम्मीदवारों की सूची में कैंट क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया था। उनका जन्म 30 जून 1946 को हुआ था। उनके परिवार में दो बेटे और चार बेटियां हैं। रोहाणी 1998 में पहली बार मध्य प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष बने और वर्ष 2003 से लगातार दो बार अध्यक्ष चुने गए।
रोहाणी का जन्म पाकिस्तान के सिंध मे हुआ था। वह 1973 में जबलपुर नगर निगम के मनोनीत पार्षद बने। उन्होंने पहली बार 1978 में तिलक वार्ड से पार्षद का चुनाव लडा और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष भी बने। 1985 में जबलपुर पश्चिम से उन्हें विधानसभा का टिकट मिला लेकिन वह कांग्रेस के चंद्र कुमार भनोट के मुकाबले चुनाव हार गए थे। वह 1990 में बीजेपी के नगर अध्यक्ष बने और साल 1992 में जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष बने। 1993 में वह कैंट विधानसभा क्षेत्र से चुने गए और फिर उन्होंने यहां से लगातार चार चुनाव में जीत दर्ज की। ईश्वर दास रोहाणी की राजनेतिक यात्रा में उन्होंने उस ऊंचे मुकाम को हासिल कर लिया था जिसे बहुत कम लोग हासिल कर पाते है और इसके पीछे उनका सरल स्वभाव और हर व्यक्ति के सुख दुःख में खड़े होने की मंशा ही थी अपने विधानसभा छेत्र में रोहणी ने वो स्थान बना लिया था कि वे उस इलाके में अजेय उम्मीदवार के रूप में जाने पहचाने लगे थे समाचार विचार परिवार ईश्वर दास रोहणी के आकस्मिक निधन पर उन्हें अपनी श्रद्धांजली अर्पित करता है