मंथन से अमृत निकलता है विष तो ‘शिव’ ही पीते है

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भोपाल = मध्यप्रदेश के  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कल यानि  गुरुवार को मंत्रिमंडल विस्तार करेंगे। इस बात की घोषणा करने के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक ऐसी बात कह गए जिसकी राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान सीएम शिवराज ने खुद की तुलना शिव से की और मंत्रिमंडल विस्तार में आ रही दिक्कतों की तुलना खुद के विष पीने से कर गए। जब एक पत्रकार ने पूछा कि अमृत किसको मिलेगा विष किसको मिलेगा। इसपर सीएम शिवराज ने कहा कि मंथन से अमृत  निकलता है, विष तो शिव पी जाते हैं।
एक दिन पहले  शिवराज ने ट्वीट कर अपना दर्द बयां किया था।  ट्वीट में कहा था, ‘आये थे आप हमदर्द बनकर, रह गये केवल राहज़न बनकर। पल-पल राहज़नी की इस कदर आपने, कि आपकी यादें रह गईं दिलों में जख्म बनकर।’ राजनीति के जानकार मानते हैं कि यह ट्वीट शिवराज सिंह चौहान ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए किया है। वे कहना चाह रहे हैं कि आप हमदर्द बनकर आए यानी कांग्रेस की सरकार गिराकर बीजेपी में आए। उसके बाद आप मंत्रिमंडल में अपने लोगों की हिस्सेदारी को लेकर इतना तोलमोल कर रहे हैं कि यह जख्म बन चुका है। हालांकि ये सब अटकलें हैं, ज्योतिरादित्य सिंधिया की वजह से मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिरी है और शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर से मुख्यमंत्री बने हैं। ऐसे में स्वभाविक है कि सिंधिया मंत्रिमंडल में अपने समर्थकों के लिए काफी कुछ चाहते होंगे। सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर 16 पूर्व विधायक और 6 पूर्व मंत्री बीजेपी में आए हैं। जो छह लोग कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे उन्हें तो शिवराज सरकार में भी ओहदा तो चाहिए ही। इसके अलावा 16 और पूर्व विधायक भी कांग्रेस से बगावत करने के एवज में मंत्री पद की चाहत पाले हुए हैं।
सिंधिया समर्थकों में से तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत कैबिनेट में पहले से शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार बीजेपी ने 6 लोगों के अलावा बिसाहूलाल सिंह, एंदल सिंह कंसाना और हरदीप सिंह डंग को मंत्री पद का आश्वासन दिया था। वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया कैंप के ही इमरती देवी, प्रद्युमन सिंह तोमर, प्रभुराम चौधरी और महेंद्र सिंह सिसौदिया का भी मंत्री बनना तय माना जा रहा है।
कांग्रेसी नेता कहते हैं कि सिंधिया को खुश करना इतना आसान काम नहीं है। पूर्व मंत्री सज्जन कुमार ने कहा कि सिंधिया कोई ऐसे वैसे नेता नहीं हैं कि जिन्हें किसी बात के लिए मना लिया जाए। ज्योतिरादित्य सिंधिया को संतुष्ट करना आसान काम नहीं है, यह इस बार न केवल शिवराज सिंह चौहान बल्कि पूरी बीजेपी को पता चल जाएगा।
भोपाल के राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि सिंधिया और नरोत्तम को खुश करने के फेर में शिवराज सिंह चौहान अपनी पसंद के नेता को भी मंत्री पद नहीं दे पा रहे हैं। शायद इसी बात को जाहिर करने के लिए सीएम शिवराज ने पत्रकार से कहा कि समुद्र मंथन से निकला विष तो खुद शिव पीते हैं और अमृत लोगों में बंटता है। शिवराज के विष वाले बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने तंज कसा है। कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा है, मंथन इतना लंबा हो गया कि अमृत तो निकला नहीं , सिर्फ़ विष ही विष निकला है। मंथन से निकले विष को तो अब रोज़ ही पीना पढ़ेगा, क्योंकि अब तो कल से रोज़ मंथन करना पढ़ेगा। अमृत के लिये तो अब तरसना ही तरसना पढ़ेगा। इस विष का परिणाम तो अब हर हाल में भोगना पढ़ेगा।’