ये वाला नहीं, वो वाला बाबा चाहिए….

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ज़हीर अंसारी
जब परिस्थितियाँ अनुकूल न हो व्यंग्यों के ज़रिए तनावमुक्त होना चाहिए। इस व्यंग्य को व्यंग्य समझकर पढ़ें, दिल पर न लें। धन्यवाद।
हेलो मिस्टर…..
टी हियर……कैसा है भाई…
आई एम फ़ाईन…
एंड यू….
आई एम इन लिटिल ट्रबल….
अरे क्या हुआ….
चीन का नासूर झेल रहा हूँ..अब तो भगंदर बनता जा रहा है…..
ओह… इधर भी यही हाल….
यार सुनो, मेरे कहने पर तुमने मुझे ढेर सारी दवाइयाँ भेजी थी, याद है न। हालाँकि उससे बहुत फ़ायदा तो नहीं हुआ लेकिन फिर भी काम निकाल लिया। अपनी इज्जत का फ़ालूदा बनते बनते रह गया।
ओके… ओके…भाई अगर भाई के काम न आया तो भाई कैसा।
वेरी ट्रु, यार तुम्हें तो पता है, साल के अंत में यहाँ चुनाव है। कोरोना की वजह से बड़ी किरकिरी हो रही है। पब्लिक धकापेल मरे जा रही है। चें-पें मची है। यहाँ की मीडिया आपके यहाँ जैसी पिछलग्गू नहीं है। हमारी मीडिया सुबह से रात तक मेरी टाई की नॉट खैंचती रहती है। बेवजह फिंगरिंग करती है।
अरे भाई, क्या कह रहे हो। आप बोलो तो मैं अपने यहाँ के बंदे भेज देता हूँ। सुबह से रात तक बताए राग पर सुर अलापती रहेगी। बस… ये बताओ.. कब और कितने बंदे भेजना है। आज ही रवाना करूँ क्या।
न…न… मीडिया को तो मैं सँभाल लूँगा। उसकी फ़िक्र छोड़ो। मुझे बाबा चाहिए….
कौन सा बाबा। हमारे यहाँ तो बाबाओं, मुल्लाओं, गंडा ताबीज़ वालों की पैदावार बहुत है। आप जिस पर उँगली रख दो, सौ-पचास भिजवा दूँगा। साथ में कुछ एक्सट्रा भी रखवा दूँगा।
अरे नहीं भाई… मैं उस बाबा की बात कर रहा हूँ।
अच्छा… अच्छा। तो आपको गोरा बाबा चाहिए। मादाम का चहेता। गोरा-नारा, चिकना-चुपड़ा वाला बाबा। न भाई न। और कुछ माँग लो, सब दे दूँगा। वो वाला बाबा मेरे बड़े काम है। हमारे लिए तो गोरा वाला बाबा तरूप का इक्का है। कई बार पपलू का भी काम कर जाता है और हम बाज़ी जीत जाया करते हैं।
अरे यार, नहीं न। गोरा बाबा आप ही सहेजो, मुझमें इतनी क्षमता नहीं है झेलने की। वैसे भी मुझे कॉमन टाइप बाबा और मुल्ला नहीं चाहिए। वो वाला चाहिए जो बहुत ही स्पेशल है।
अच्छा समझ गया, कृपा बरसवानी है। कृपा वाला बाबा चाहिए।
न…न….वो भी नहीं। यहाँ इतने बड़े वाले भी नहीं है जो कृपा के लिए गोलगप्पे गप्प करें। इन्हें तो पिज़्ज़ा, बर्गर और फ़ास्ट फ़ूड चाहिए और इससे कृपा बरसती नहीं।
तो भाई क्लीयर बताओ.. हमारे पास ऐसे बहुत हैं।
हम्म.. पता है। आपके यहाँ तो ऐसे लोगों की खेती होती है। टोपी-तिलक सम्मानीय होते हैं, उन्हें मेरा सलाम और प्रणाम कहिएगा। मैं उन बाबा की बात कर रहा हूँ जो धर्म और राष्ट्रवाद की चोटी पर चढ़कर सफल बिज़नेसमैन बन गए हैं। जिन्होंने सन 2013 में गौ मूत्र से सोना बनाने का दावा किया था। काला धन लाने की बात कही थी। अब सुना है बड़ी रिसर्च के बाद कोरोना की दवा बना ली है।
सच सुना है भाई….
भाई ग़ज़ब बाबा है आपका। हमारे यहाँ सब निकम्मे निकले। बड़े-बड़े डाक्टर, साइनटिस्ट और रिसर्चर्स मोटी तनख़्वाह लेकर भी घुंन्या छील रहे हैं। हज़ारों लोग कोरोना से मर गए पर दवा और वैक्सीन न बना सके, और न ही अब तक मानव टेस्ट सफल कर पाए। हमारा पुराना पार्टनर ब्रिटेन भी अब तक कुछ न कर सका। ख़ुशी की बात है कि आपके यहाँ कोरोना मेडिसिन बन गई है। आपको बहुत-बहुत बधाई। भाई ये बताओ.. कोरोना पेशेंट आपने दिए थे या बाबा ने खुद एकत्रित किए थे। मेरी इंटेलिजेंस ने बताया कि कोरोना पेशेंट का इलाज आप सरकारी अस्पतालों में करवा रहे हो।
बिलकुल ठीक सुना आपने। एक भी कोरोना पेशेंट कहीं नहीं जाने दिया। सब का मुफ़्त इलाज सरकारी ख़ज़ाने से हुआ।
तो भाई ये बताओ… बाबा ने अपनी दवा की रिसर्च के लिए पेशेंट कहाँ से लाए।
ये राज है, इसे राज ही रहने दो। हमारा ये वाला बाबा बहुत ब्रिलियंट है और इनका जूनियर औषधि जादूगर। अगर दोनों को परिवहन मिल जाए तो मंगल ग्रह पर औषधि उगा आएँ।
हाँ सुना तो मैंने भी है कुछ ऐसा ही है। ये वही हैं जो पैंतीस रुपए लीटर पेट्रोल बिकवा रहे थे। चार लाख करोड़ रुपए का काला धन विदेशों से ला रहे थे। फिर से सोने की चिड़िया पैदा करने वाले थे।
सही पकड़े हैं। यू आर राईट। ही इज़ सेम बाबा।
बस यही वाला बाबा लौटती फ़्लाइट से भिजवा दो। मुझे कोरोना की दवाई मिल जाएगी और सरकार में वापस लौटने का फ़ंडा भी।
ओके… पहले मुझे बात कर लेने दो बाबा से।
अरे बात क्या करना। बाबा आपकी बात तो टालेंगे नहीं। वो भी आपके पक्के वाले प्रशंसक हैं। हाँ अगर आना-कानी करें तो आप मेरी तरफ़ से भरोसा दिला देना कि अगर उनकी दवाई और फ़ंडा ओके रहा तो कई हज़ार एकड़ ज़मीन दे दूँगा और कई प्लांट लगवा दूँगा अपने यहाँ।
चलिए मैं बात करता हूँ बाबा से….
बात-वात न करें प्लीज़, मेरी प्रोब्लम को समझते हुए उन्हें ससम्मान फ़ौरन भेजने की व्यवस्था करें। चुनाव सिर पर है। उनकी दवाओं से मेरा चुनाव बच सकता है। प्लीज़, जल्दी भिजवाइए वरना मेरी बाट लग जाएगी।
ओके… ओके।
(डेढ़ मिनिट बाद….)
हेलो भाई…
अब क्या हुआ
सुनो न.. अब उन बाबा जी को मत भेजना।
क्यों…
बीबीसी ने अभी बताया कि बाबा जी यू टर्न ले लिया। दवा प्रामाणिक नहीं है। मुझे अपनी लुद्धी नहीं सुटवानी है। मेरी रिक्वेस्ट कैंसिल। बाय।
बाय…