कहो तो कह दूँ = अब ‘मौसा की बुआ के भतीजी की साली के बहनोई के साढ़ू भाई की बहन का बेटा डे’ भी मनेगा

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चैतन्य भट्ट  

जब भी अखबार के पन्ने पलटो तो उसी दिन कोई न कोई डे होता है आज ‘फलाना डे’ है तो कल ‘ढिकाना डे’ l कल ही ‘फादर्स डे’ निकला है उसके पहले ‘मदर्स डे’  ‘डॉटर डे’ ‘म्यूजिक डे’ पृथ्वी डे ‘पुरातत्व डे’ ‘डॉक्टर्स डे’ ‘नर्स डे’  ‘ब्रदर्स डे’ ‘अल्कोहल डे’  ‘फ्रेंड्स डे’ ‘कार डे’ ‘स्कूटर  डे’ ‘सायकल डे’ ‘चॉकलेट डे’ ‘हग डे’ ‘पेंटिंग डे’ ‘रोस डे’  ‘वेलेंटाइन डे’ ‘ग्रैंड डॉटर डे’ ‘ग्रेंड मदर डे’ ‘ग्रैंड फादर डे’ ‘पर्यावरण डे’ ‘योग डे’ ‘कुश्ती डे’ ‘शतरंज डे’ ‘भाला फेंक डे’ यानी कोई ऐसी चीज नहीं बची है जिसका ‘डे’ न मनाया जा रहा होl साल के तीन सौ पेंसठ डे में से आधे से ज्यादा  दिन तो इन ‘डे’ को मनाने में निकल जाते है बाकी के दिन में आदमी क्या करे, तो इसकी खोजबीन चालू है कि इन्हे कौन से ‘डे’ में ‘एकोमोडेट’ किया जाएl  सुना है अब आगे ‘चेहरा डे’ फिर ‘होंठ डे” हाथ डे’ ‘ पैर डे’ ‘सर डे’ ‘कान डे’ ‘बाल डे’ ‘माथा डे’ ‘ नाक डे’ ‘पेट डे’  ‘पीठ डे’ ‘कन्धा डे’ भी मनाया जायेगा उसके बाद भी दिन बचे तो फिर ‘अंगूठा डे’  ‘बीच की उंगली डे’ ‘रिंग  फिंगर  डे’ ‘छिंगली डे’ मनाया जाएगाl उसके बाद भी कोटा पूरा नहीं होगा तो फिर सामने आएगा ‘बड़ी उंगली की पहली पोर डे’ फिर ‘छिंगली की तीसरी पोर डे  ‘जुल्फ डे’ ‘घुंघराले बाल डे’ ‘सीधे बाल डे’  ‘लम्बे बाल डे’ ‘छोटे बाल डे’  ‘बॉबकट डे’ उस पर भी मन नहीं भरेगा तो ‘एक हजार सातवा बाल डे’  मनाया जाएगाl इन सबके बाद भी दिन बचेंगे तो निगाह रिश्तेदारो पर जाएगी,  ‘मौसा डे’ ‘बुआ डे’ ‘साला डे’  ‘साढ़ू भाई डे’ ‘साली ‘डे’  ‘ननद डे’  ‘फूफा डे’ ‘फूफी डे’  भी मनाये जाने लगेंगे और कम पड़े तो फिर  दोहरे रिश्ते  वाले डे सामने आएंगे, जैसे ‘मौसा की बुआ डे’  ‘साले का बहनोई डे’  ‘साली की ननद डे’  ‘साढ़ूभाई का भतीजा  डे’  और उस पर भी मन नहीं भरा तो रिश्तों  की लम्बी चैन वाला डे भी  मनाया जाएगा, जैसे  ‘मौसा की बुआ के भतीजी की साली के बहनोई के साढ़ू भाई की बहन का बेटा डे’ या ‘फ़ूफ़ा की बहन के नाना के चाचा के  साले के मौसा की बेटी डे’  वैसे तो जानवरों के नाम पर तो डे है लेकिन ये ‘टाइगर’ या ‘ऐलिफेंट डे’ तक सीमित है अब इन्हें भी इसमें  शामिल करना  होगा जैसे ‘चूहा डे’ ‘बिल्ली डे’ ‘उल्लू डे’ ‘शुतुरमुर्ग डे’ ‘छछूंदर डे’ ‘चींटी डे’  ‘काक्रोच डे’ ‘छिपकली डे’ ‘कनखजूरा डे’ ‘पटार डे’ ‘लड़ैया डे’ ‘सियार डे’ ‘भालू डे’  ‘भेड़िया डे’l अपना मानना है कि अब उन लोगो के लिए ये मसाला पर्याप्त है जो ये ‘डे’ बना रहे है पाठकों से आग्रह है कि और भी कोई ‘डे’ यदि बन सकते हो तो मुझे  जरूर बताये ताकि मैं इस लिस्ट को और आगे बढ़ा सकूंl