पानी की भीड़ कोरोना फैलाव का सबब न बन जाए…….

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ज़हीर अंसारी
पिछले दो महीने से जिले का पूरा अमला कोरोना वायरस के फैलाव की रोकथाम में लगा हुआ है। स्थानीय प्रशासन की मेहनत काफ़ी हद तक रंग लाई भी है। जबलपुर जैसे नगर में अब तक मात्र 194 कोरोना पॉज़िटिव मिले हैं इनमें से 115 मरीज़ स्वस्थ्य होकर घरों को लौट चुके हैं। जो सुखद
माना जा रहा था कि गर्मी का तापमान बढ़ने से कोरोना का असर कम होगा मगर वैज्ञानिकों इस तथ्य को भी नकार दिया। इसके उलट जो स्थिति वर्तमान में दिख रही है वह यह कि पानी की क़िल्लत शासन-प्रशासन के अब तक के सारे किए-धरे पर पानी फेरने जा रहा है। पानी के लिए लगने वाले भीड़ कहीं कोरोना फैलाव का सबब न बन जाए। यदि ऐसा हुआ तो हालात इंदौर, मुंबई, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे भयावह हो जाएँगे।
यह बात सबको भली-भाँति पता है कि शहर के कई घनी आबादी वाले इलाक़े हर साल पानी की क़िल्लत से जूझते हैं। वहाँ टेंकरों से पेयजल प्रदाय किया जाता है। टेंकर आते ही भीड़ का जमावड़ा हो जाता है। यही हाल नल खुलने के वक़्त देखे जा सकते हैं। हर साल की तरह इस साल भी जलसंकट की स्थिति बनती जा रही है। मगर इस बार टेंकरों और नल के पास जमा होने वाली भीड़ शहर के लिए कहीं प्रकोप न बन जाए। कोरोना नामक घातक वायरस शहर के कई क्षेत्रों में पैर पसार चुका है।
कोरोना से जंग लड़ रहे शासन-प्रशासन को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। ज़रा सी चूक से हालात बेक़ाबू हो सकता है। जैसा कि बताया गया है मैटल में कोरोना विषाणु बारह से चौदह घंटे तक जीवित रहता है। एक कोरोना इंफ़ेक्टेड द्वारा नल या टेंकर छू लेने से या उसके सम्पर्क में आने वाले कई लोग संक्रमित हो सकते हैं। एक टेंकर एक दिन में कई बस्तियों के फेरे लगाता है।
इसलिए यह बहुत आवश्यक हो गया है कि कोरोना रोकथाम में लगे अफ़सरान इस ओर विशेष ध्यान दें। जल वितरण के वक़्त फ़िज़िकल डिस्टन्स का कड़ाई से पालन करवाएँ, वरना एक ही झटके में उनकी अब तक की सारी मेहनत चौपट हो जाएगी।