शंकराचार्य जयंती पर मठ में किया गया संकल्पबद्ध सामूहिक शंखनाद

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इंदौर। आदिगुरु शंकराचार्य जयंती पर मंगलवार को एरोड्रम क्षेत्र दिलीप नगर स्थित शंकराचार्य मठ में एक साथ कई शंखों की ध्वनि गूंज उठी।
वास्तव में सनातन धर्म के पुनरोद्धारक आद्य गुरु शंकराचार्य की जयंती पर मठ प्रभारी डॉ. गिरीशानंदजी महाराज के सान्निध्य में सनातन धर्म के रक्षार्थ सामूहिक संकल्पबद्ध शंखनाद किया गया।
सामूहिक शंखनाद में लॉकडाउन के नियमों के तहत डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए डॉ. गिरीशानंदजी के साथ ही शंकराचार्य भक्त मंडल के पं. राजेश शर्मा, पं. अभिषेक शर्मा, दुर्गा शक्तिपीठ के पुजारी मनोज चौधरी और समाजसेवी रोहित चौकसे ने प्रमुख रूप से दूूरी बनाते हुए कतारबद्ध हो शंख फूंके। इसके पूर्व आदिगुरु शंकराचार्य के छायाचित्र का पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया।
महान दार्शनिक भी थे शंकराचार्य
इस अवसर पर महाराजश्री ने कहा कि विश्व के महान दार्शनिक, आदि गुरु शंकराचार्य ने ऐसे समय जन्म लिया था, जब सनातन धर्म लुप्त होने के कगार पर था। उन्होंने शिक्षा-दीक्षा और संन्यास लेकर अपने अकाट्य तर्कों से नास्तिक धर्म को भारत भूमि से विलुप्त कर सनातन धर्म का पुनरुद्धार किया। इसी के साथ भारत की अखंडता और एकता की कामना को लेकर चारों दिशाओं में मठों की स्थापना कर अपने आचार्यों को स्थापित किया। ये हैं पूर्व में गोवर्धन मठ (जगन्नाथ पुरी), पश्चिम में शारदा मठ (द्वारिका), उत्तर में ज्योतिष मठ (बद्रीनाथ) और दक्षिण में शृंगेरी मठ (रामेश्वरम)। आज भी इन मठों के माध्यम से आचार्यों के मार्गदर्शन में धार्मिक और सामाजिक कार्य संचालित किए जाते हैं।