कोरोना से निबटने मोदी ने ली थी डाक्टरों से सलाह

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नई दिल्ली=प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस पर राष्ट्र के नाम अपने दूसरे संबोधन से पहले देशभर के एक्सपर्ट डॉक्टरों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बात की। इस दौरान हैदराबाद से जुड़ी डॉक्टरों की टीम के प्रमुख ने प्रधानमंत्री को कुछ बातें बिल्कुल बिंदुवार तरीके से बताईं।
बिल्कुल बेहिचक और बेखौफ अंदाज में उन्होंने कहा, ‘छोटे और मझौले अस्पतालों के डॉक्टर, नर्स, वॉर्ड बॉय को अवकाश पर भेज दिया है उनका वेतन सुरक्षित नहीं है। उन्हें यह भी पता नहीं है कि वे वापस काम पर आ भी पाएंगे या नहीं।’उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में हमें हर मेडिकल प्रोफेशनल्स को अपने साथ करना होगा। इसके लिए उनका वेतन, उनकी छुट्टियां, उनकी नियुक्तियां सुरक्षित रखना बेहद महत्वपूर्ण है। सीधे सरकार से इसकी व्यवस्था काफी मददगार साबित होगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े डॉक्टर ने तेलंगाना के वारंगल में कुछ डॉक्टरों के साथ हुए दुर्व्यवहार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, ‘इसी तरह की एक और बुरी खबर कल वारंगल से आई जहां मकान मालिकों ने कई जूनियर डॉक्टरों को उनके घरों से निकाल दिया। मकान मालिक साफ-साफ कह रहे थे कि ये डॉक्टर संक्रमित हैं, ये गंदे हैं। और ये डॉक्टर्स सचमुच में सड़क पर आ गए। मुझे लगता है कि समाज को संकट के इस दौर में स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।’ उन्होंने प्रधानमंत्री से इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया।
लॉकडाउन की घोषणा से पहले मीटिंग में प्रधानमंत्री मोदी को डॉक्टर ने कहीं बड़ी बातें
लॉकडाउन की घोषणा से पहले मीटिंग में प्रधानमंत्री मोदी को डॉक्टर ने कहीं बड़ी बातेंहैदराबाद से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े डॉक्टर ने बिल्कुल बेहिचक और बेखौफ अंदाज में प्रधानमंत्री के सामने कोरोना से निपटने की राह में मौजूदा चुनौतियां गिनाईं तो इन्हें दूर करने की रणनीति भी सुझाई।
हैदराबाद से जुड़े डॉक्टर ने कहा कि कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई अभी लड़ाई लंबी चलने वाली है। उन्होंने कहा, ‘इसलिए हमें वर्कफोर्स पर रणनीति बनानी पड़ेगी। हमें वर्कफोर्स का बैकअप तैयार करना होगा। जैसे कि केरल ने कल ही पब्लिक सर्विस कमिशन की वेटलिस्ट वाले 300 लोगों की नियुक्ती की। हमें भी स्टाफ का बैकअप सुनिश्चित करना होगा जिनका इस संकट के समय इस्तेमाल हो सके।’
डॉक्टर ने निजी अस्पतालों की ओर से निर्देशों के उल्लंघन का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा, ‘देश को दिए आपके संदेशों और प्राइवेट अस्पतालों को राज्यों की ओर से जारी निर्देशों के बावजूद इलेक्टिव सर्जरी की जा रही है। बड़ी बात यह है कि इलेक्टिव सर्जरी में आईसीयू बेड का उपयोग होता है। वैसे ही आईसीयू बेड कम हैं, अगर संकट बढ़ा तो हमारी परेशानी बढ़ जाएगी। इसलिए सरकार की तरफ से बिल्कुल कड़ा संदेश जाना चाहिए।’

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