21 दिन : परीक्षा की घड़ी

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21 दिन : परीक्षा की घड़ी | samachar-vicharरवींद्र वाजपेयी

देश के सामने परीक्षा की घड़ी एक बार फिर आ खड़ी हुई है। ये कहना भी गलत नहीं होगा कि 130 करोड़ आबादी वाले इस देश को दुनिया के समक्ष अपनी एकता, परिपक्वता, अनुशासन और समर्पण भाव प्रदर्शित करने का यह बेहतरीन अवसर है। कोरोना वायरस के हमले ने पूरी दुनिया को हलाकान कर दिया है। संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। हजारों मारे जा चुके हैं। स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। चिकित्सा विशेषज्ञ और वैज्ञानिक हतप्रभ हैं। कोरोना क्या है ये तो सब समझ चुके हैं किन्तु उसको रोकने का उपाय और उससे संक्रमित व्यक्ति का इलाज करने की माकूल दवा अभी तक नहीं खोजी जा सकी। हालांकि ऐसा दावा किया जा रहा है कि वैज्ञानिक सफल हो गये हैं लेकिन पूरी दुनिया तक टीके और दवाइयां पहुंचने में लम्बा वक्त लगेगा और तब तक कोरोना चुपचाप नहीं बैठेगा। चूंकि इसका संक्रमण मानवीय सम्पर्क से फैलता है अत: इससे बचाव का सबसे प्रारम्भिक और सटीक इलाज संपर्कों की श्रृंखला को तोडऩा है और इसीलिये गत रात्रि प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में आगामी 21 दिनों तक लॉक डाउन लागू करने की घोषणा के साथ ये भी बता दिया कि यदि इस दौरान लापरवाही बरती गई तो देश 21 साल पीछे चला जाएगा। भारत एक प्रजातांत्रिक देश है जहां व्यक्तिगत आजादी और मौलिक अधिकारों का बड़ा सम्मान है। लेकिन जब इंसानी जिन्दगी पर खतरा मंडरा रहा हो तब निजी स्वतंत्रता गौण हो जाती है। बीते कुछ दिनों से देश के बड़े हिस्से में लॉक डाउन लागू होने पर भी एक वर्ग उसे गम्भीरता से नहीं ले रहा था। ऐसे लोग पूरे समुदाय के लिए जानलेवा बन सकते थे। शायद यही वजह रही कि प्रधानमन्त्री को हाथ जोड़ते हुए अपील करनी पड़ी कि अपने घरों के सामने लक्ष्मण रेखा खींचकर उसके भीतर ही रहें। उन्होंने साफ कहा कि वे प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं अपितु परिवार के सदस्य के रूप में ऐसा कह रहे हैं। कोरोना की श्रृंखला को तोडऩे का यही उपाय लगभग सभी देश अपना रहे हैं। पूरी दुनिया इस समय ठहरी हुई है। संक्रमण को बढऩे से रोकने का यही एकमात्र तरीका फिलहाल नजर आ रहा है और इसकी सफलता चीन में प्रमाणित भी हो चुकीं है। ऐसे में भारत जैसी बड़ी आबादी वाले देश में बीमारी के फैलाव पर रोक लगाने का और कोई तरीका था भी नहीं। बीते कुछ दिनों में संक्रमित लोगों की संख्या में हुई तेज वृद्धि से स्थिति गम्भीर होने लगी थी। यद्यपि भारत में अभी तक लगभग 550 मरीज ही सामने आये हैं और उनमें से भी 10 फीसदी ठीक भी हो गए लेकिन हजारों ऐसे हैं जो विदेश से लौटने के बाद एहतियात के तौर पर 14 दिनों तक एकान्त में रखे गये हैं। ऐसा माना जाता है कि दो सप्ताह के भीतर संक्रमण असर दिखाने लगता है। इस प्रकार अभी संक्रमित लोगों की संख्या के बारे में सही आंकड़ा नहीं आया है। लेकिन इसे ईश्वर की कृपा कहना गलत नहीं होगा कि विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश, जहां घनी बस्तियों की भरमार है में कोरोना का असर अब तक तो काफी कम हुआ किन्तु जऱा सी असावधानी इसके विस्फोट का कारण बन सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी भारत से अपेक्षा की है कि वह चेचक और पोलियो जैसी विजय कोरोना पर हासिल कर दुनिया के समक्ष एक उदाहरण पेश करे। इस बारे में काबिले गौर एक बात ये भी है कि आज का भारत विश्व समुदाय से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। भारतीय अब विश्व समुदाय बन चुके हैं। पृथ्वी के सभी हिस्सों में भारतीय मूल के लोग रह रहे हैं। ऐसे में हमारा अंतर्राष्ट्रीय संपर्क चाहे-अनचाहे कायम रहना अवश्यम्भावी है। व्यापार और पर्यटन के कारण भी दुनिया भर में हमारा आना-जाना बढ़ा है। उस दृष्टि से भारत को केवल अभी नहीं अपितु आगे भी सतर्क रहना होगा। प्रधानमंत्री ने गत दिवस 15 हजार करोड़ की राशि इस आपदा से निपटने के लिए घोषित की जो अपेक्षित भी थी और आवश्यक भी किन्तु समय आ गया है जब भारत में चिकित्सा सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा जावे। भारत जैसे विशाल देश में जहां बड़ी आबादी अभी भी गरीबी रेखा से नीचे बसर करने मजबूर हो, विकसित देशों जैसी स्वास्थ्य सेवाएं सपना भले ही प्रतीत होती हों लेकिन इसे साकार करना ही होगा। कोरोना एक मुसीबत बनकर जरुर आया है लेकिन इसके कारण हमें बहुत कुछ सोचने और करने का अवसर भी मिला है। आगामी 21 दिन निश्चित रूप से किसी तपस्या से कम नहीं होंगे। पूरा देश घरों में रहेगा। कारोबार ठप होने से करोड़ों लोगों के समक्ष रोजी रोटी और पेट भरने की सामस्या आ खड़ी हुई है। ऐसे हालात किसी भी देश और समाज को अपनी ईमानदारी और एकजुटता साबित करने का अवसर प्रदान करते हैं। अपने निजी हितों से बाहर आकर सामूहिक सोच के साथ जीवन जीने के इस मौके का सही उपयोग करना ही समय की मांग है। प्रधानमन्त्री ने जिस अंदाज में बीती रात देश से अपील की उसमें सख्ती और समझाइश दोनों थीं। उनके सम्बोधन में खतरे की गहराई को खुलकर दिखाया गया साथ ही ये उम्मीद भी जताई गई कि संकट के इन क्षणों में एक नया भारत उभरकर सामने आयेगा। आने वाले 21 दिन भारत की क्षमता और संकल्पशक्ति को प्रमाणित करने वाले होंगे। कोरोना पर विजय अब एक राष्ट्रीय अभियान है जिसको लेकर किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। प्रबन्धन का एक सूत्र है कि गलतियों से सीखो। कोरोना से भी हम बहुत कुछ सीखेंगे। इन 21 दिनों में इस देश का कायाकल्प होगा इस अवधारणा को मजबूत करने की जरूरत है।