अपनी ही सरकार के खिलाफ सिंधिया के तीखे तेवर नरम पड़े

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भोपाल = मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयान से गरमाई राजनीती में कोआर्डिनेशन कमेटी की बैठक ने पानी डाल कर ठंडा कर दिया है मुख्यमंत्री कमलनाथ और पार्टी के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया में तनातनी की के बीच मध्य प्रदेश कांग्रेस कोऑर्डिनेशन कमिटी की मीटिंग आयोजित की गई। इस मीटिंग में सीएम और सिंधिया समेत पार्टी के प्रदेश स्तर के कई बड़े नेता शामिल हुए। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए सिंधिया ने सकारात्मक संकेत दिए हैं।
प्रदेश कांग्रेस के दोनों नेताओं के बीच झगड़े का मामला सोनिया गांधी तक पहुंचने के बाद इस मीटिंग को काफी अहम माना जा रहा था। बैठक से बाहर निकलने के बाद सिंधिया से जब मीडियाकर्मियों ने बात की तो उन्होंने सकारात्मक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह एक प्रॉडक्टिव मीटिंग थी। हम सकारात्मक रूप से काम करने के लिए आगे बढ़ेंगे। गौरतलब है कि इस मीटिंग में वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, दीपक बाबरिया, एआईसीसी इनचार्ज मीनाक्षी नटराजन और जीतू पटवारी भी शामिल थे। उल्लेखनीय है कि कमलनाथ और सिंधिया के बीच विवाद तब ज्यादा खुलकर सामने आ गया था, जब शिक्षकों के समर्थन में अपने ही सरकार के खिलाफ सिंधिया ने सड़क पर उतरने की चेतावनी दे दी थी। इसके बाद उनके बयान को निशाना बनाते हुए एमपी सरकार के मंत्री गोविंद सिंह ने कहा था कि उन्हें सड़क पर उतरने की बजाय प्रदेश की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सीएम से बात करनी चाहिए। वहीं, कमलनाथ से जब इसे लेकर सवाल पूछा गया था तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि वचन पत्र पांच साल के लिए होता है, पांच महीने के लिए नहीं।
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