समाज के अँधेरे में गीता के ज्ञान की रोशनी बिखेरता एक अफसर ………..

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ग्वालियर मध्यप्रदेश = उनके जिस्म पर खाकी वर्दी है, वो वर्दी जो समाज से अपराध और अपराधियों को जड़ समेत हटाने के लिए पहनाई जाती है, जाहिर है जो वर्दी उनके जिस्म पर पैबस्त है उसने अनेक खूंखार अपराधियों को उनके अंजाम तक पंहुचाया होगा, एक आईपीएस के नाते समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी अपराध का खात्मा करना है लेकिन इससे इतर यदि कोई पुलिस अधिकारी समाज के दूसरे पहलुओं को भी अपने भीतर आत्मसात कर लेता है तो वो न केवल पुलिस फ़ोर्स में एक अलहदा अधिकारी के रूप में सामने आता है बल्कि समाज में भी उसे एक पुलिस अधिकारी से से अलग व्यक्ति के रूप में पहचान मिलती है, और ऐसे ही एक पुलिस अधिकारी है ग्वालियर ज़ोन के एडीजी राजा बाबू सिंह| समाज के भीतर फैले अँधेरे को राजाबाबू सिंह गीता के ज्ञान की रोशनी से आलोकित करने की कोशिश में लगे हुए हैं , पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ ये उनका ब्रह्म वाक्य है औरअपने पुलिसिया कर्तव्यों को बेहतरीन तरीके से निभाते हुए वे सामाजिक कामों को भी बखूबी अंजाम दे रहे हैं| ग्वालियर में एडीजी के रूप में अपना एक साल पूरा करने के बाद समाचार विचार डॉट कॉम से बातचीत में राजाबाबू सिंह ने बताया कि जब वे दिल्ली में इंडो तिब्बत फ़ोर्स में बतौर आईजी तैनात थे तब मैंने अपने खाली समय में गीता का अध्ययन शूरू किया | गीता के प्रति मेरा अनुराग बहुत पहले से था पर दिल्ली में जब मुझे काफी वक्त मिला तब मैंने गीता के मर्म को समझने की कोशिश और ये पाया कि गीता में वीओ सब कुछ है जिसकी आज समाज को जरूरत है, बस यही से मेरे दिलो दिमाग में गीता जैसे छा सी गयी मैंने संकल्प ले लिया कि मै गीता के ज्ञान की रोशनी को समाज के हर उस जगह फ़ैलाने का काम करूंगा जंहा कुरीतियों का अँधेरा है, उन तमाम लोगो तक मै गीता का ज्ञान बाँटने की कोशिश करूंगा जिन्हे इस ज्ञान की वास्तव में जरूरत है | राजा बाबू सिंह बताते है की दिल्ली से प्रतिनियुक्ति से वापस अपने प्रदेश यानि मध्य प्रदेश आने के बाद जब मेरी पोस्टिंग छटवी बटालियन में आईजी के रूप में हुई तो मैंने पुण्य सलिला नर्मदा की सफाई का बीड़ा उठाया, बटालियन के तमाम जवान और अफसरों में श्रमदान कर नर्मदा के घाटों पर झाड़ू लगाई उन्हें धोया और नर्मदा के भीतर की गंदगी बाहर निकाल एक नया सन्देश जबलपुर वासियों को देने की कोशिश की मै चाहता था कि लगातार इस काम को अंजाम देता रहूँ लेकिन इस बीच मेरा तबादला ग्वालियर आईजी के पद पर हो गया और यंहा आकर मैंने गीता के ज्ञान को समाज के हर वर्ग में पंहुचाने का काम शुरू कर दिया| सेन्ट्रल जेल में कैदियों को गीता बांटी और उन्हें बताया कि वे गीता का अध्ययन करें यदि किन्ही कारणवश आज वे जेल में है तो गीता उन्हें वो रास्ता दिखाएगी कि जब वे जेल से बाहर आएंगे तो उनमें एक नई सोच और एक नई ऊर्जा महसूस होगी, कालेज के विद्यार्थियों समाज के अन्य वर्गो को निशुल्क गीता बांटना जैसे मेरा रोजमर्रा का काम ही हो गया राजा बाबू बताते है गीता के अलावा गांधी के दर्शन और पर्यवरण ने उन्हें बेहद प्रभावित किया है और वे गांधी क्र दर्शन को अपने व्याख्यान के माध्यम से लोगों तक पंहुचते है पर्यावरण सुधर के लिएमैंने ग्वालियर ज़ोन के अंतर्गत आने वाले तमाम थानों, पुलिस लाइन अफसरों के दफ्तरों में भारी संख्या में वृक्षरोपण करवाया ताकि वे बड़े होकर पर्यवरण को सुधरने में अपनी भूनिका निबाहयें
राजा बाबू सिंह जैसे अफसर बिरले ही होते है इसके पीछे एक कारण ये भी होता है कि पुलिस की नौकरी में पुलिसिंग के अलावे कुछ और सोचने या करने का वक्त ही नहीं मिलता फिर पुलिस के नौकरी इंसान को निष्ठुर भी बना देती है पर यदि इंसान सोच ले तो उसके सामने ये कठिनाईया कोई मायने नहीं रखती समाचार विचार डॉट कॉम राजा बाबू सिंह को उनके एक साल बेमिसाल के लिए बढ़ाई देता है और आशा करता है कि पेड़, गाँधी और गीता का ये महायज्ञ अनवरत चलता रहेगा