नोयडा और लखनऊ में अब पुलिस कमिशनर

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लखनऊ = हाल ही में नोयडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव कृष्णा के विवादों में आने के बाद लखनऊ और नोएडा में कमिश्नरेट प्रणाली लागू क्र दी गयी है लखनऊ में सुजीत पांडेय की कमिश्नर पद पर तैनाती की गई है, वहीं आलोक सिंह नोएडा के पहले पुलिस कमिश्नर बनाए गए हैं।
भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के भाग 4 के अंतर्गत जिलाधिकारी यानी डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट के पास पुलिस पर नियत्रंण के अधिकार भी होते हैं। इस पद पर आसीन अधिकारी आईएएस होता है। लेकिन पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू हो जाने के बाद ये अधिकार पुलिस अफसर को मिल जाते हैं, जो एक आईपीएस होता है। कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद जिले के डीएम के पास अटकी रहने वाली तमाम अनुमति की फाइलों का झंझट खत्म हो जाएगा।
इस व्यवस्था के तहत महानगर में पुलिस कमिश्नर का मुख्यालय बनाया जाता है और एडीजी लेवल के सीनियर आईपीएस को पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी दी जाती है। अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद, महानगर को कई जोन में बांटा जाएगा। हर जोन में डीसीपी की तैनाती होगी, जो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) की तरह उस जोन को डील करेगा। इसके अलावा 2 से 4 थानों पर सीओ की तरह एक एसीपी तैनात होंगे।
सीआरपीसी की मैजिस्ट्रियल पावर वाली कार्रवाई अब तक जिला प्रशासन के अफसरों के पास थी, वह अब पुलिस कमिश्नर को मिल जाएगी। सीआरपीसी की धारा 107-16, 144, 109, 110, 145 का क्रियान्वयन पुलिस कमिश्नर कर सकेंगे।होटल के लाइसेंस, बार लाइसेंस, हथियार का लाइसेंस भी पुलिस दे सकेगी।
कमिश्नर सिस्टम से शहरी इलाकों में भी अतिक्रमण पर अंकुश लगेगा। अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाने का आदेश सीधे तौर पर कमिश्नर दे सकेगा और नगर निगम को इस पर अमल करना होगा।
यूपी के पूर्व डीजीपी बृजलाल ने योगी सरकार द्वारा नई व्यवस्था लागू किए जाने के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से अब सीधे जनता को फायदा होगा। उन्होंने कहा, ‘पहले बहुत से काम फाइलों में अटके रहते थे, पुलिस कड़ी कार्रवाई नहीं कर पाती थी, इस नई व्यवस्था से पुलिस को कई बड़े अधिकार मिलेंगे और उनसे जनता का काम आसान हो जाएगा।’