आडवानी ने इस्तीफ़ा क्यों दिया था ये वे ही जाने

0
220

नयी दिल्ली – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कहना है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के त्यागपत्र का सही कारण क्या है, वही बता सकते हैं, लेकिन उनके अचानक ऐसा करने से संघ प्रमुख सहित सबको धक्का लगा है।संघ के मुखपत्र ‘पांचजन्य’ के नवीन अंक में प्रकाशित उसके अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य के लेख में ऐसा कहा गया है।
इस इस्तीफे से संघ परिवार में ‘संकट निर्माण’ और उसे सुलझाने के लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत तथा आडवाणी के बीच तुरत-फुरत संवाद स्थापित करने की बात स्वीकार करते हुए लेख में कहा गया है, ‘‘पहला फोन किसने किया? आडवाणी जी ने या भागवत जी ने? ऐसे प्रश्न खड़े करने का कोई अर्थ नहीं है। भाजपा में संकट का निर्माण हुआ है, वह दूर हो, ऐसा ही भाजपा के सब हितचिंतकों को लगता होगा।’’
वैद्य ने कहा है, ‘‘लालकृष्ण आडवाणी के त्यागपत्र का सही कारण वे ही बता सकेंगे। उन्होंने अपने त्यागपत्र में पार्टी से कुछ अपेक्षाएं व्यक्त की हैं, वे अपेक्षाएं ठीक ही हैं। लेकिन उनका त्यागपत्र अचानक आने से सबको धक्का लगा। संघ के सरसंघचालक को भी लगा होगा।’’
भागवत द्वाराआडवाणी से बात करने और उनसे इस्तीफा वापस दिलवाने को सही बताते हुए उन्होंने कहा, ‘‘आडवाणी जी जैसे वयोवृद्ध, अनुभवसमृद्ध और ज्येष्ठ नेता को पार्टी में रहना चाहिए और उसी दृष्टि से किसी ने सरसंघचालक जी से आडवाणी जी के साथ बात करने की विनती की होगी, इसमें अनुचित क्या है?’’लेख में इस प्रकरण पर उंगली उठाने वालों से पूछा गया, अपने कार्यकर्ताओं द्वारा संचालित कार्य सही तरीके से चलता रहे, उसमें मतभेद होने पर भी मनभेद न हो, क्या ऐसा प्रयास करना अस्वाभाविक है।भागवत द्वारा आडवाणी से बात करके उन्हें इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाने को संघ का भाजपा में हस्तक्षेप बताने और यह ‘ताना मारने’ कि आरएसएस को अब खुलकर राजनीति में आ जाना चाहिए आदि को वैद्य ने खारिज करते हुए कहा, ‘‘संघ ऐसे उपदेश मान्य नहीं करेगा। कारण, उसे राजनीति की अपेक्षा राष्ट्र का महत्व अधिक लगता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘संघ चाहे तो चुनावी राजनीति में उतरने से उसे कोई रोक नहीं सकता, लेकिन राजनीति जैसे सामाजिक जीवन के सिर्फ एक क्षेत्र के साथ एकरूपता नहीं रखना , यह संघ की भूमिका है और संकल्प भी है।’’