ये घमंड की हार है =चाचा शिवपाल बोले

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नई दिल्ली =पांच राज्यों में हुए चुनावों के लिए शनिवार को हुई मतगणना के रुझानों और नतीजों में जहां बीजेपी को धमाकेदार जीत मिली है, वहीं एसपी और कांग्रेस के गठबंधन को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। घरेलू और पार्टी कलह का सामना कर रहे यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने पिता और पार्टी के सबसे बड़े नेता मुलायम सिंह यादव के खिलाफ जाकर कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था। अब जब उनका यह प्रयोग बुरी तरह से असफल नजर आ रहा है, विरोधियों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोलना शुरू कर दिया है।
अखिलेश पर पहला बड़ा हमला उनके चाचा और पार्टी के नेता शिवपाल यादव ने किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवपाल ने कहा कि यह समाजवादी पार्टी की नहीं, बल्कि घमंड की हार है। शिवपाल ने कहा कि मुलायम को हटाया गया और उनका अपमान किया गया।वोटों की गिनती से ऐन पहले जब शिवपाल से उनकी जीत के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि पार्टी को बड़ी जीत मिलेगी क्योंकि लोगों ने उनका समर्थन किया है।
ऐसा लगता है कि एसपी को अपनी इस हार की आशंका पहले से ही थी। मतगणना से ठीक पहले अखिलेश ने संकेत दिए कि वह सत्ता से बाहर रहने के बजाए बीएसपी के साथ जाना पसंद करेंगे। वहीं, इससे कुछ दिन पहले अखिलेश की सौतेली मां और परिवार में हुए विवाद के लिए कुछ नेताओं द्वारा जिम्मेदार ठहराई गईं साधना गुप्ता ने बागी तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि अब वह खुलकर बोलेंगी क्योंकि पार्टी में नेताजी यानी मुलायम का अपमान हुआ है। साधना ने अपने बेटे प्रतीक के राजनीति में आने की भी इच्छा जताई। इससे संकेत मिलते हैं कि आने वाले वक्त में समाजवादी कुनबे में एक बार फिर कलह मच सकती है।
चुनाव से ऐन पहले अखिलेश यादव को पार्टी और परिवार में जबरदस्त घमासान का सामना करना पड़ा। उनके पिता मुलायम सिंह यादव उनके खिलाफ हो गए। अखिलेश खेमे ने इसकी वजह अमर सिंह और शिवपाल यादव को बताया। लंबी खींचतान चली और आखिर में अखिलेश पार्टी पर अपना वर्चस्व कायम करने में कामयाब रहे। वह खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और मुलायम को संरक्षक बनाकर एक तरह से राजनीतिक हाशिए पर ढकेल दिया। अमर सिंह को बाहर का रास्ता दिखाया गया, जबकि शिवपाल को किनारे लगा दिया गया। अब ताजे नतीजों के बाद समाजवादी पार्टी का सिर फुटव्वल एक बार फिर शुरू हो सकता है।