आखिरकार अमेरिका रूस के आगे झुक ही गया

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मॉस्को -सीरिया को लेकर आखिरकार अमेरिका को रूस के सामने झुकना ही पड़ा। अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने रूस की लंबे समय से उस मांग को मान लिया है कि राष्ट्रपति बशर अल-असद के भविष्य का फैसला सीरियाई लोगों को करने देना चाहिए। मॉस्को और वॉशिंगटन में सीरिया के सिविल वॉर को खत्म करने के लिए इसी मुद्दे पर मतभेद था। रूस असद के साथ खड़ा था तो अमेरिका असद को सत्ता छोड़ने के लिए कह रहा था।
जॉन केरी ने रूसी राजधानी मेंराष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक के बाद कहा, ‘यूनाइडेट स्टेट और हमारे सहयोगी तथाकथित रूप से सीरिया में सत्ता में बदलाव नहीं चाहते। केरी ने घोषणा की कि सीरिया पर इस हफ्ते के बाद न्यू यॉर्क में एक बड़ी इंटरनैशनल कॉन्फ्रेंस होगी। इसके साथ ही केरी ने असद पर इस बात को फिर से दोहराया कि उन्होंने बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है। पश्चिम के देश इस मामलें असद को लेकर एकजुट थे। इन देशों ने सीरिया पर रासायनिक हथियारों से हमले के भी आरोप लगाए हैं। ऐसे में असद को लेकर पिछले चार सालों से तनातनी की स्थिति बनी रही।
लेकिन इस बातचीत के बाद असद को अहम इंटरनैशनल समर्थन मिला है। केरी ने कहा, ‘अब हमारा फोकस मतभेदों और इस पर नहीं है कि क्या करना चाहिए। असद को लेकर भी हम अड़े हुए नहीं हैं। अब हमें सीरिया में मिलजुलकर शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है ताकि सीरियन अपने मुल्क के भविष्य पर अपना फैसला ले सकें।’
इस कदम को अमेरिकी विदेश नीति में बड़े बदलाव की तरह देखा जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से असद को लेकर अमेरिका बेहद सख्त था। अमेरिका का अब कहना है कि मध्य-पूर्व में दुनिया के खतरनाक आतंकी संगठन आईएसआईएस के बढ़ते प्रभाव को कम करना पहली प्राथमिकता है। बराक ओबमा ने 2011 की गर्मियों में पहली बार कहा था कि असद कुर्सी खाली करें। उसके बाद से अमेरिका लगातार कहता रहा है कि असद को अनिवार्य रूप से सत्ता छोड़नी होगी। अब अमेरिका ने रूस के साामने अपना हथियार डाल दिया है। असद को लेकर विश्व समुदाय में अब वैसी जिद नहीं रहेगी।
दूसरी तरफ रूस अड़ा था कि किसी भी विदेशी सरकार को सीरिया में असद को हटाने की बात नहीं करनी चाहिए। रूस का कहना था कि सीरिया के लोग नेतृत्व पर फैसला खुद ही करेंगे। रूस आखिरी सितंबर से सीरिया में विद्रोहियों पर बम बरसा रहा है। कहा जा रहा है कि रूस ऐसा असद को बचाने के लिए कर रहा था। केरी ने कहा कि कोई भी इस बात को थोपने की कोशिश नहीं कर सकता कि या तो आप एक तानाशाह को चुनें या आतंकवादियों को।