आज कलम से दंगा करने वाला हूँ

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एल एन शीतल

आज कलम का कागज से
मैं दंगा करने वाला हूँ,
मीडिया की सच्चाई को मैं
नंगा करने वाला हूँ

मीडिया जिसको लोकतंत्र का
चौथा खम्भा होना था,
खबरों की पावनता में
जिसको गंगा होना था
आज वही दिखता है हमको
वेश्या के किरदारों में,
बिकने को तैयार खड़ा है
गली-चौक बाजारों में

दाल में काला होता है
तुम काली दाल दिखाते हो,
सुरा सुंदरी उपहारों की
खूब मलाई खाते हो!

गले मिले सलमान से आमिर,
यह तो खबरों का स्तर है,
और दिखाते इंद्राणी का
कितने फिट का बिस्तर है.
म्यांमार में सेना के
साहस का खंडन करते हो,
और हमेशा दाउद का
तुम महिमा मंडन करते हो!

हिन्दू कोई मर जाये तो
घर का मसला कहते हो,
मुसलमान की मौत को
मानवता पे हमला कहते हो!

लोकतंत्र की संप्रभुता पर
तुमने कैसा मारा चाँटा है,
सबसे ज्यादा तुमने हिन्दू
मुसलमान को बाँटा है!!

साठ साल की लूट पे भारी
एक सूट दिखलाते हो,
ओवैसी को भारत का तुम
रॉबिनहुड बतलाते हो!!

दिल्ली में जब पापी वहशी
चीरहरण में लगे रहे,
तुम ऐश्वर्या की बेटी के
नामकरण में लगे रहे!!

‘दिल से’ दुनिया समझ रही है
खेल ये बेहद गन्दा है,
मीडिया हाउस और नहीं कुछ
ब्लैकमेलिंग का धंधा है!!

गूंगे की आवाज बनो
अंधे की लाठी हो जाओ,
सत्य लिखो निष्पक्ष लिखो
और फिर से जिंदा हो जाओ!!

श्री एल एन शीतल वरिष्ठ पत्रकार है और अपनी लेखनी के माध्य से पत्रकारिता की बुराईयों को उजागर करते रहते है प्रस्तुत कविता मीडिया की वर्तमान स्थिति पर पूरी तरह सटीक बैठती है श्री शीतल वर्त्तमान में नवभारत ग्रुप में वरिष्ठ समूह संपादक है