राष्ट्रपति की चिंता के बाद मोदी ने दादरी पर तोड़ी चुप्पी

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नवादा -बिहार के चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार उन मुद्दों पर पर बोला जिन पर कहा जा रहा था कि वह जानबूझकर चुप हैं। हाल ही में दादरी में एक मुस्लिम शख्स की गोमांस खाने और रखने की अफवाह के बाद हिंसक भीड़ ने हत्या कर दी थी। पीएम के बारे में कहा जा रहा था कि वह इन मुद्दों पर चुप हैं और उनके नेता भड़काऊ बयान दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने रैली को संबोधित करते हुए कहा, हम लोगों के लड़ाने वाले बयानों पर ध्यान न दें। जो नेता फालतू बयान देकर हालात खराब करना चाहतें हैं उन पर ध्यान मत दीजिए। मोदी ने कहा, ‘कल राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी दादजी ने जो कहा है वह हमारा रास्ता है। उन्होंने हमें राह दिखाई है। हम उसी रास्ते पर चलेंगे। उसी रास्ते को अपना कर हम अपने मुकाम तक पहुंच सकते हैं। इसलिए हमें दादाजी के बयान पर ही ध्यान देने की जरूरत है। हिन्दू-मुसलमानों को आपस में लड़ना है या गरीबी से लड़ाई करनी है?’
बुधवार को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने इस बात पर जोर दिया था कि भारत को अपने बुनियादी मूल्य धर्मनिरपेक्षता, बहुलता और धार्मिक सहिष्णुता को बनाये रखने जरूरत है। उन्होंने इस बात पर चिंता जतायी थी कि हम इसे नष्ट कर अपनी पहचान नहीं बचा सकते। प्रणव मुखर्जी ने हाल में घटी कई सांप्रदायिक घटनाओं पर चिंता जतायी थी। राष्ट्रपति ने कहा था कि विविधता हमारी पहचान है और इसे हर हाल में कायम रखा जाए।
मोदी ने कहा, ‘मैं देशवासियों को कहना चाहता हूं, राजनीति के कारण छोटे-मोटे हर अपना राजनीतिक स्वार्थ पूरा करने के लिए उटपटांग बयान देने पर तुले हैं। इन नेताओं की बयानबाजियों पर ध्यान मत दीजिए। खुद मोदी भी कहता है अगर, उसकी भी बात मत सुनिए। अगर सुनना है तो कल हमारे देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी दादा ने जो भाषण किया है और देश को जो संदेश दिया है उससे बड़ा कोई और संदेश मार्गदर्शन नहीं हो सकता है। हमारे देश के मुखिया राष्ट्रपति जी ने जो कहा है उससे बड़ा कोई विचार नहीं हो सकता।’
प्रधानमंत्री पर आरोप लग रहा था कि वह अपने नेताओं पर लागाम नहीं लगा रहे हैं। मोदी की चुप्पी को लेकर ही देश से तीन अहम लेखकों ने साहित्य अकादमी सम्मान लौटा दिया था। प्रधानमंत्री के लिए चुप रहना अब मुश्किल हो गई थी। पीएम ने गुरुवार को रैली में कहा कि हमें गरीबी से लड़ाई लड़नी है न कि मुसलमानों से। पीएम ने कहा, ‘लोग राजनीतिक हित साधने के लिए उटपटांग बयान दे रहे हैं। आप उन नेताओं के फालतू बयानों पर ध्यान नहीं दें। इंडिया एक है। यहां सभी समुदायों को मिलकर रहने की जरूरत है। हम ऐसा करेंगे तभी विकास के मार्ग पर चल सकेंगे।’पीएम की चुप्पी तोड़ने पर कांग्रेस प्रवक्ता अजॉय कुमार ने कहा कि उन्होंने बहुत देर कर दी है फिर भी हम उनके बयान का स्वागत करते हैं। कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री अपने नेताओं और आरएसएस पर लगाम कसें। समाजावादी पार्टी ने भी कहा कि पीएम को सलाह देने से ज्यादा अपने नेताओं पर ऐक्शन लेने की जरूरत है। एसपी नेता ने कहा कि योगी आदित्यनाथ और संगीत सोम जैसे नेताओं को रोकने की जरूरत है न कि बड़ी बात कहने की।