क्या सत्ता परिवर्तन कराएंगे शनि और मंगल?

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भूमिपुत्र भौम यानी मंगल ने 4 अगस्त 2012 को तुला राशि में चुपके से दस्तक दी, जहां पहले से ही उनका कट्टर शत्रु शनि विराजमान था। मंगल और शनि दोनों ही उग्र समझे जाते हैं। मंगल अग्नि पुंज हैं वहीं शनि बर्फ के सदृश। दोनों का यह गठजोड़ उस राशि तुला में है जो शुक्र की राशि है और व्यापार, उद्योग, आनंद व ऐश्वर्य की राशि समझी जाती है। तुला में मंगल के आने की दस्तक ने ही भारत के उत्तर पूर्व भाग को बेचैन कर दिया, और संसद का कामकाज बाधित हो गया क्योंकि मंगल देवताओं के सेनापति हैं तो शनि दूसरे पक्ष की सैन्य बागडोर के साथ न्याय का जिम्मा संभाले हुए है। यह स्थिति 28 सितंबर तक बनी रहेगी। 28 सितंबर को मंगल स्वयं की राशि में वृश्चिक में प्रविष्ट होंगे। तब तक हमें नए-नए संघर्ष का साक्षी बनना पड़ेगा। 4 अगस्त को शनि पुनः तुला राशि में पहुंचे हैं, यूं तो शनि तुला राशि में 15 नवंबर 2011 को ही आ गए थे पर 15 मई को वक्री होकर पुनः कन्या में पहुंच गए थे।

परिवर्तन और संघर्ष की गाथा
तुला का यह शनि जो सत्ता परिवर्तन और संघर्ष के लिए कुख्यात रहा है, इस बार भी कोई न कोई अलबेली कथा अवश्य लिखेगा। पिछली बार सन 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री राजीव गांधी के मित्रों के रूप में नए-नवेले नेताओं का प्रादुर्भाव हुआ और पुराने व वरिष्ठ नेताओं के पर कतरे गए। कुछ हाशिए पर तो कुछ दुनिया से ही विदा हो गए। इस बार तुला के शनि के पुनर्प्रवेश के आसपास राजनीति के दिग्गज प्रणव मुखर्जी को वानप्रस्थ व बहुत पहले प्रमोशन डिजर्व करने वाले सुशील कुमार शिंदे को आश्चर्यजनक रूप से स्टेपनी से निकाल कर फ्रंट लाइन पर तैनात किया गया। सुशील कुमार शिंदे की इस पदोन्नति में उनकी कुंडली के शनि और बृस्तपति तथा बुध के घर में बैठे शुक्र और स्वयं बुध ने बड़ी भूमिका अदा की, लेकिन अक्टूबर-नवंबर के बाद उनका यही ताज उन्हें चुभने लगेगा। जब उनकी केतु की महादशा आरंभ होगी तब श्री शिंदे जो अपने संतुलित वाकशक्ति के लिए पहचाने जाते हैं, धीरे-धीरे अपनी वक्तत्व कला भूलते नज़र आएंगे, और बेकार के बयानों से छोटे-मोटे विवादों को भी जन्म देंगे। अतः उन्हें सावधान रहने की जरूरत है।

तुला का यह शनि कई राजनेताओं, कलाकारों और नामचीन हस्तियों को असाह्य रोग प्रदान करेगा और उन्हें हमसे छीन लेगा। देवानंद, भूपेन हजारिका, राजेश खन्ना और विलासराव देशमुख की असहज मृत्यु इसी विचार को दृढ़ कर रही है। किसी शक्तिशाली और नामचीन महिला के लिए यह शनि आश्चर्यजनक दास्तान लिखने जा रहा है, क्योंकि शुक्र जो स्त्री का भी प्रतीक है उसमें शनि की उपस्थिति असामान्य कथाएं ही लिखती रही हैं।

नवंबर के बाद नए खेल
नवंबर के बाद सत्ता और विपक्ष दोनों की पेशानी पर बल पड़ने लगेंगे और सत्ता, शक्ति, स्कैम और सेक्स के नए तमाशे यह शनि हमें दिखाएगा। युवा नेतृत्व के लिए स्थिति कुछ बेहतर होगी। डॉ. मनमोहन सिंह के लिए यह दो वर्ष तलवार की धार सिद्ध होंगे। बीच-बीच में मध्यावधि चुनाव का शोर जोर पकड़ेगा। लोकसभा के चुनाव परिणाम अप्रत्याशित होंगे, क्योंकि इतिहास तो तुला के शनि में सत्ता परिवर्तन की चुगली कर रहा है।

कारोबार के लिए कठिन दौर
कारोबार व बाजार के लिए यह समय सबसे कठिन दौर में से एक साबित होगा। चमक-दमक वाले नामचीन व्यापारिक हस्तियों के छक्के छूटते नज़र आएंगे। शेयर बाजार में बड़ी बेचैनी नज़र आएगी। कई प्रमोटर कानूनी अड़चनों में फंसकर देश से बाहर निकलने की राह तलाशेंगे। हवा में उड़ने वाले जमीं पर होंगे। लग्जरी प्रॉडक्ट्स के लिए यह कालखंड शुभ नहीं रहेगा। हीरे की चमक पत्थर की तरह फीकी पड़ने लगेगी। निवेश के लिए यह दो वर्ष शुभ नहीं हैं। टेक्सटाइल, शुगर, एंटरेटेनमेंट व जूलरी के बाजार भाव गर्त में जाने के बाद शनि बदलते ही बड़ी छलांग अवश्य लगाएंगे।

प्रॉपर्टी को सुकून
प्रॉपर्टी बाजार के लिए संकेत न बहुत अच्छे हैं न बहुत बुरे, क्योंकि प्रॉपर्टी में तेजी का जिम्मेदार बुध का शनि है और उसे जमींदोज मंगल का शनि करता है। अतः प्रॉपर्टी की यह असामान्य तेजी अगस्त 2014 के पश्चात ध्वस्त होती हुई नजर आएगी।

युवाओं के लिए बेहतर
खेल के लिए यह शनि बड़े उलटफेर कराएगा। अंडर-19 के कई युवा खिलाड़ी फ्रंट लाइन में तैनात होकर सुखद इबारत लिखेंगे। युवाओं का भविष्य बेहतर नज़र आ रहा है।

आनंद जोहरी
ज्योतिषी एवं आध्यात्मिक चिन्तक