भूपिंदर सिंह हुड्डा नियुक्तियों को लेकर घिरे

0
52

चंडीगढ़ =हरियाणा में मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा स्टेट इन्फर्मेशन कमिशन के नए सदस्यों और राइट टु सर्विस कमिश्नरों की विवादास्पद नियुक्तियों को लेकर चौतरफा घिर गए हैं। इन नियुक्तियों पर विरोध जताते हुए बिजली मंत्री अजय यादव ने इस्तीफा दे दिया और उन्होंने कहा कि किसी को तो बिल्ली के गले में घंटी बांधनी ही थी, यह काम मैंने किया। प्रशासनिक सुधार विभाग के सचिव प्रदीप कासनी ने नियमों को ताक पर रखकर नियुक्ति करने का आरोप लगाते हुए इसपर साइन करने से इनकार कर दिया था।
इस बीच, कासनी ने मंगलवार को कहा कि विरोध जताने की वजह से उन्हें एसएमएस कर राज्य के चीफ सेक्रेटरी एससी चौधरी धमकी दे रहे हैं। मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक एसएमएस में चीफ सेक्रेटरी ने प्रदीप कासनी को लिखा है, ‘गुड नाइट…प्लीज सेलिब्रिटी वाली हैसियत इंजॉय करो…लेकिन, अपनी मां का दूध पिया है तो मेरे सारे मेसेज प्रेस को दिखा देना।’
कासनी ने कहा कि नियुक्तियों पर आपत्ति जताने के कारण मुझे हर तरफ से टारगेट किया जा रहा है। हालांकि चीफ सेक्रेटरी ने धमकी देने की बात को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने टाइम्स नाउ से कहा कि मैंने केवल ऑफिसर को बाधई दी है। प्रदीप कासनी ने हुड्डा को बताया था कि इन कमिश्नरों की नियुक्तियों में नियमों का पालन नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि गर्वनर के पास जो फाइल भेजी गई है, वह संदिग्ध है। उसमें ओवराइटिंग और कई कटिंग्स हैं।
रविवार को हुड्डा ने जैसी जल्दबाजी की उससे वह खुद ही सवालों में घिर गए हैं। हुड्डा ने राज्य के नए गवर्नर कप्तान सिंह सोलंकी के कार्यभार संभालने के कुछ ही घंटों के भीतर छुट्टी के दिन रविवार को आनन-फानन में दो इन्फर्मेशन कमिश्नर और 3 कमिश्नरों को शपथ दिला दी थी। इन तीनों को नियुक्ति तब मिलती जब कासनी नियुक्ति पत्र जारी करते। तथ्य यह भी है कि पहले इन्फर्मेशन कमिश्नरों को गवर्नर शपथ दिलाते थे।
बीजेपी और आईएनएलडी समेत अन्य विपक्षी दलों ने हुड्डा सरकार पर जल्दबाजी में नियुक्ति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के प्रशासनिक सुधार सचिव प्रदीप कासनी ने इस आधार पर नियुक्ति का विरोध किया था कि इसमें नियमों का कथित तौर पर पालन नहीं किया गया।
सरकार की तरफ से सफाई देने आए चीफ सेक्रेटरी ने दावा किया कि इन नियुक्तियों को राज्यपाल से मंजूरी मिली थी और उन्होंने दस्तखत के जरिए मुख्यमंत्री को इन पदों पर नियुक्त होने वालों को शपथ दिलवाने के लिए अधिकृत किया था। जो भी नियुक्तियां हुई हैं, वे पूरी तरह से वैधानिक और नियमों के तहत हुई हैं। सभी औपचारिकताएं पूरी करने वाले सदस्यों को ही शपथ दिलवाई गई है और उन्हें नियुक्ति पत्र भी दिए जा चुके हैं।
हरियाणा के बिजली मंत्री अजय यादव ने नियुक्ति समेत कई आयोगों और संवैधानिक यूनिटों में भर्ती में पक्षपात का आरोप लगाते हुए मंगलवार को भूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार से इस्तीफा दे दिया। यादव ने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा हुड्डा को भेज दिया है। हालांकि 6 बार रेवाड़ी से कांग्रेस के सांसद रह चुके यादव कांग्रेस पार्टी में बने रहेंगे। यादव ने कहा कि हाल में हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने राज्य में महज एक सीट से जीती है लेकिन वह कोई भी सबक सीखने में नाकाम रही।
उन्होंने कहा, ‘किसी को तो बिल्ली के गले में घंटी बांधनी ही है। और मैंने यह कदम उठाने का फैसला किया है। जब उनसे पूछा गया कि उनके इस्तीफे पर हुड्डा की क्या प्रतिक्रिया थी तो यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें एक बार फिर सोच लेने के लिए कहा लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। यादव ने कहा, ‘मैं कांग्रेस आलाकमान द्वारा फैसला लिए जाने का इंतजार कर रहा हूं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने अपने मुद्दे कैबिनेट की कई बैठकों में उठाए थे तो उन्होंने कहा कि कैबिनेट की बैठकें अपने अजेंडे तक सीमित होती हैं। मैंने पार्टी की हार के कारणों की विस्तृत जानकारी एंटनी पैनल को दे दी थी। यादव ने कहा कि वह जल्दी ही पार्टी आलाकमान से मिलेंगें। मैं सम्मान चाहता हूं। यदि यह नहीं दिया जाता तो मैं और क्या कर सकता हूं?
उन्होंने कहा, ‘मुझे इस्तीफे जैसा कदम मजबूरी में उठाना पड़ा है। इसके मुख्य कारण हैं- विकास, कई आयोगों और संवैधानिक यूनिटों में नियुक्ति, सदस्यों को शामिल करने के मामलों में पक्षपात, अफसरशाही का बोलबाला, विधायकों समेत पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, और लोकसभा चुनावों में हार के बावजूद कोई सबक नहीं लेना है।