कभी नहीं कहा मोदी एकमात्र ईमानदार नेता है -विकीलीक्स

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नई दिल्ली -अपने खुलासों के लिए मशहूर वेबसाइट विकीलीक्स ने कहा है कि उसके केबल में कभी भी किसी अमेरिकी डिप्लोमैट ने बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी को ‘ईमानदार’ नहीं कहा था। विकीलीक्स ने ट्वीट की सीरीज में 2011 में आए अपने केबल पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि इसमें कभी नहीं कहा गया था मोदी ‘भारत के एकमात्र ईमानदार नेता’ हैं।एक बड़े खुलासे में विकीलीक्स ने ट्वीट की एक सीरीज में कहा है कि न तो उसने और न ही उसके संस्थापक जूलियन असांजे ने कभी भी मोदी की तारीफ की और इस मामले में बीजेपी समर्थकों ने झूठा प्रचार किया था।
ट्वीट्स में आगे कहा गया है कि मोदी के समर्थकों ने इस बारे में आक्रामक रूप से झूठा प्रचार किया कि विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन अंसाजे ने मोदी का समर्थन किया था। साथ ही विकीलीक्स ने बीजेपी पर अंसाजे द्वारा मोदी के समर्थन करने के झूठे प्रचार का आरोप लगाया।
यह स्पष्टीकरण उस केबल के बारे में है जो उसने वर्ष 2006 में मुंबई के काउंसलर माइकल एस ओवेन द्वारा मोदी के साथ हुई मीटिंग के बाद भेजा गया था, जिसे वर्ष 2011 में विकीलीक्स ने लीक किया था। इसमें ओवेन ने मोदी के साथ हुई मीटिंग का विस्तार से ब्यौरा दिया था। जिसमें गुजरात के विकास से लेकर, गोधरा दंगे के बाद हुए मानवाधिकार हनन के मुद्दे पर मोदी के साथ हुई बातचीक का जिक्र था।
केबल में लिखा है कि मोदी ने इस बातचीत में अपने विकास का ब्यौरा दिया था, जिसमें बेहतर सड़कों,सभी तक बिजली की पहुंच, पानी की उपलब्धता, प्रत्यक्ष निवेश और इकनॉमिक डिवेलपमेंट आदि शामिल थे। हालांकि, जब काउंसलर ने मोदी से सांप्रदायिक रिश्तों और 2002 के दंगों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के बारे में पूछा तो नाराज मोदी ने अपने बचाव में अमेरिका पर प्रहार करते हुए अबू गरीब जेल में अमेरिकी कार्रवाई के लिए उस पर मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात की और कहा कि मुसलमान किसी और जगह से ज्यादा सुरक्षित गुजरात में हैं।
2011 में विकीलीक्स द्वारा केबल लीक किए जाने के बाद उस समय मोदी ने इस बात पर प्रसन्नता जताई थी कि ‘मैं खुश हूं अमेरिका ने माना मोदी ईमानदार हैं’। बीजेपी ने इस मौके का फायदा उठाते हुए तब कहा था कि यह केबल इस बात का प्रमाण है कि मोदी भारत के एकमात्र ईमानदार, निर्भीक, और स्वच्छ छवि के नेता हैं। पार्टी ने यह भी कहा था कि इस केबल से पता चलता है कि अमेरिका को अपने उस निर्णय पर पछतावा है, जिसमें उसने मोदी को वीजा देने से इनकार कर दिया था।