दिल्ली में एक फरवरी से बिजली संकट

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नई दिल्ली – ईस्ट, नॉर्थ-ईस्ट और सेंट्रल दिल्ली में रहने वाले लोगों के घरों की 1 फरवरी से हर दिन 8 से 10 घंटे तक बत्ती गुल हो सकती है। इसका कारण है निजी बिजली कंपनी बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड ने अपने इलाके में रोजाना 24 घंटे बिजली सप्लाई करने से मना कर देना। इसका कारण रुपयों की कमी को बताया गया है। कंपनी का कहना है कि उसके पास बिजली खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं, इसलिए उसे बिजली कटौती करनी पड़ सकती है। इससे मेट्रो सेवा भी प्रभावित हो सकती है।
अगर ऐसा होता है तो इससे 60 लाख से ज्यादा लोगों को सीधे तौर पर इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि कंपनी के इस कदम को सरकार का उसका ऑडिट कराने के आदेश का जवाब माना जा रहा है। जिसमें कंपनी सरकार पर दबाव की राजनीति बनाकर ऑडिट रुकवाने पर काम करने की योजना बना रही हैं। पावर डिपार्टमेंट के सूत्रों के मुताबिक, बीएसईएस यमुना के सीईओ अरविंद गुजराल ने पावर सेक्रेटरी पुनीत कुमार गोयल को चिट्ठी लिखकर समस्या की जानकारी दे दी है।
25 जनवरी को लिखे गएपत्र में सीईओ ने साफतौर पर कहा है कि अब कंपनी के पास आगे बिजली खरीदने के लिए रुपये नहीं हैं। इसलिए हो सकता है कि 1 फरवरी से उन्हें हर रोज 10 घंटे तक भी बिजली कटौती करनी पड़ जाए। अगर ऐसा होता है तो शाहदरा से कश्मीरी गेट और कश्मीरी गेट से शिवाजी स्टेडियम वाले मेट्रो रूट भी प्रभावित होंगे। बीएसईएस यमुना के पास इस वक्त 14 लाख 70 हजार ग्राहक हैं। इनसे करीब 60 लाख लोगों को बिजली मिलती है।
बिजली कंपनी के एक सूत्र ने बताया कि कंपनी को बिजली ट्रांसमिशन और खरीदने के नाम पर दिल्ली ट्रांस्को, एनटीपीसी, एनएचपीसी, डीवी और एसजेवीएनएल आदि कंपनियों को 2500 करोड़ रुपये देने हैं, जो उनके पास नहीं है, जबकि उसे डीईआरसी से 6200 करोड़ रुपये लेने हैं। जिसे दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेग्युलेटरी कमिशन देने का नाम नहीं ले रही है। दूसरी ओर विभिन्न बैंकों से भी अब उन्हें लोन नहीं मिल रहा है। चूंकि बैंकों को लोन देने की एवज में कोई न कोई गारंटी चाहिए होती है।
पत्र में बताया गया है कि हो सकता है कि बीएसईएस यमुना को रोजाना 500 मेगावाट तक बिजली कम मिले। ऐसे में उन्हें बिजली सप्लाई 10 घंटे तक भी काटना पड़ सकता है।