आन्ध्र में उपद्रव अब भी जारी

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हैदराबाद -आंध्र प्रदेश के विभाजन का विरोध कर रहे आंदोलनकारियों ने कांग्रेस के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और नेताओं के घरों, ऑफिसों और उनके व्यापारिक ठिकानो पर हमले किये जबकि इस दौरान भरी संख्या में पुलिस बल तैनात था इसके बाद भी इन लोगों ने हमले किए। विशाखापत्तनम में वाईएसआर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री डी.पुरंदेश्वरी के ऑफिस में जबरन घुसने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।काकिनाडा में भी वाईएसआर कांग्रेस के कार्यकर्ता केंद्रीय मंत्री पल्लम राजू के घर के बाहर धरने पर बैठ गए और उनके इस्तीफे की मांग की।विभाजन के विरोध में रायलसीमा और तटीय आंध्र के बिजली कर्मचारियों की रविवार से शुरू अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण राज्य के 6 जिलों में बिजली सप्लाई काफी प्रभावित हुई।उल्लेखनीय है कि जब से केंद्रीय कैबिनेट ने आंध्र प्रदेश को विभाजित कर तेलंगाना राज्य के गठन का फैसला किया उस वक़्त से वंहा उपद्रव चालू हो गया है जिसके रुकने का कोई अता पता नहीं है
इधर मंगलवार को यूपीए की समन्वय समिति और कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मंजूरी मिल जाने के बाद अलग तेलंगाना राज्य का बनना तय हो गया है। यह देश का 29वां राज्य होगा।कांग्रेस महासचिव और आंध्र प्रदेश प्रभारी दिग्विजय सिंह ने बताया कि तेलंगाना में 10 जिले शामिल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि हैदराबाद 10 वर्षों तक दोनों राज्यों की साझा राजधानी होगा। इसके बाद तटीय आंध्र के किसी हिस्से में आंध्र प्रदेश की राजधानी बनाई जाएगी जबकि हैदराबाद तेलंगाना राज्य की ही राजधानी रहेगा।
नए तेलंगाना राज्य के गठन में राज्य के गठन में छह महीने का वक्त लगेगा। इसके लिए संसद द्वारा राज्य पुनर्गठन विधेयक को साधारण बहुमत से पारित कराने सहित कई कदम उठाने होंगे। इस विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा में पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता नहीं होगी, जैसा आम तौर पर संविधान संशोधन विधेयक में होता है।
गौरतलब है कि कांग्रेस कार्य समिति द्वारा तेलंगाना पर फैसले से पूर्व तेलंगाना विरोधी कांग्रेसी सांसदों ने सोनिया गांधी से मुलाकात कीकांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तेलंगाना के गठन का विरोध कर रहे पार्टी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया था कि पृथक तेलंगाना राज्य पर फैसला करते समय उनकी चिंताओं को ध्यान में रखा जायेगा।