“संसद में अभी भी जिंदा है विन्ध्यप्रदेश का प्रस्ताव’

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“जयराम शुक्ल

विन्ध्यप्रदेश के पुनरोदय को लेकर विधानसभा में सन् 2000 में सर्वसम्मति से संकल्प पारित कर प्रस्ताव लोकसभा भेजा जा चुका है। सुंदरलाल तिवारी जब सांसद थे तब उन्होंने लोकसभा में इसे लेकर जोरदारी से सवाल उठाया था इसका जवाब भी तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने दिया था..लोकसभा में यह प्रस्ताव अभी मरा नहीं.. फाइलों में जिंदा से पिछले बीस साल से…अब असल भूमिका विंध्यक्षेत्र के सात सांसदों की है..ये चाहें तो तेलंगाना की तरह केंद्र सरकार को मजबूर कर सकते हैं..।
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एक था विंध्यप्रदेश,जानिए उसकी मर्मकथा..
– 4अप्रैल 1948 को विंध्यप्रदेश का विधिवत उद्घाटन पं.नेहरू के प्रतिनिधि तत्कालीन केंद्रीय लोकनिर्माण मंत्री एन बी गाडगिल ने किया..।
– विंध्यप्रदेश में आठ जिले- रीवा, सीधी, सतना, शहडोल,पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, दतिया थे..।
– क्षेत्रफल 24598 वर्गमील, जनसंख्या 24330734 थी
-14 अप्रैल1949 को विंध्यप्रदेश का मंत्रिपरिषद भंगकर इसे केंद्र शासित बना दिया गया। इसके विलीनीकरण का यह पहला आघात था।
– समाजवादी युवातुर्क जगदीश चंद्र जोशी, यमुना प्रसाद शास्त्री, श्रीनिवास तिवारी के नेतृत्व में विंध्यप्रदेश बचाने का आंदोलन चला।
-2 जनवरी 1950 को आंदोलनकारियों पर सरकार ने गोली चलवा दी, मो.अजीज, गंगा और चिंताली शहीद हो गए।
– विंध्यप्रदेश का विलयन रुक गया, दिल्ली की सरकार झुक गई, विंध्यप्रदेश बच गया।
-2 अप्रैल 1952 को विंध्यप्रदेश की विधानसभा के लिए पहला निर्वाचन हुआ।
– पं.शंभूनाथ शुक्ल(शहडोल) मुख्यमंत्री, शिवानंद जी(सतना) विधानसभा अध्यक्ष, श्यामसुंदर दास(दतिया) विधानसभा उपाध्यक्ष व चंद्रप्रताप तिवारी (सीधी) नेता प्रतिपक्ष बने।
– 1956 में राज्यपुनर्गठन आयोग बना..। आयोग का रीवा में पुरजोर विरोध हुआ फिर भी कैबिनेट सेकेट्री बीपी मेनन साहब ने विंध्यप्रदेश के विलय की सिफारिश कर दी।
– विधानसभा के भीतर हुए तीखे विरोध, तोड़फोड़ के बावजूद बहुमतवाली किंतु दिल्ली नेतृत्व के आगे मजबूर व असहाय विंध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार ने इस प्रदेश की अकालमृत्यु पर अपनी मुहर ठोक दी..। 1 नवंबर 1956 को मध्यप्रदेश अस्तित्व में आया।
-10 मार्च 2000 के दिन मध्यप्रदेश की विधानसभा में कांग्रेस विधायक शिवमोहन सिंह(अमरपाटन) ने विंध्यप्रदेश के पुनरोदय का अशासकीय संकल्प रखा जिसका समर्थन भाजपा विधायक रमाकान्त तिवारी(त्योंथर) ने किया।
– विंध्यप्रदेश के पुनरोदय का यह अशासकीय संकल्प सर्वसम्मति से पास हुआ, विधानसभाध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी ने अग्रिम कार्रवाही के लिए लोकसभा भेज दिया।
-27 मार्च 2000 को भोपाल में बघेलखण्ड व बुंदेलखंड के विधायकों, पूर्वविधायकों ने अभूतपूर्व एकजुटता का परिचय देते हुए विंध्यप्रदेश के पुनरोदय के प्रति संकल्प व्यक्त किया
– श्रीनिवास तिवारी की अध्यक्षता व जयराम शुक्ल के संयोजन में हुए इस अधिवेशन में..बुंदेलखंड के गांधी पूर्व सांसद लक्ष्मीनारायण नायक, विधायक मगनलाल गोइल(टीकमगढ़) विधायक उमेश शुक्ल(छतरपुर), पूर्वमंत्री कैप्टन जयपाल सिंह(पन्ना)पूर्वमंत्री लालता प्रसाद खरे(सतना), मंत्री इंद्रजीत कुमार(सीधी), विधायक राजेंद्र भारती(दतिया), पूर्व विधायक केशरी चौधरी(दतिया), विधायक शबनम मौसी(शहडोल),सांसद सुंदरलाल तिवारी(रीवा), विधायक रामप्रताप सिंह(सतना), मंत्री सईद अहमद( सतना), बिश्वंभर दयाल अग्रवाल(भास्कर समूह),विधायक पंजाब सिंह(सीधी), मंत्री राजमणि पटेल (रीवा) विधायक शिवमोहन सिंह( रीवा), पूर्व विधायक विजय नारायण राय(सतना) आदि हजारों जनप्रतिनिधियों ने अधिवेशन में विंध्यप्रदेश के पुनरोदय के प्रति अपना संकल्प दोहराया।
– 21 जुलाई 2000 को लोकसभा में तत्कालीन सांसद सुंदरलाल तिवारी के एक प्रश्न के जवाब में गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने बताया था कि विंध्यप्रदेश की संभावनाओं का परीक्षण किया जा रहा है।
– 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ समेत तीन नए राज्य (उत्तराखंड, झारखण्ड) अस्तित्व में आ गए लेकिन पिछले उन्नीस साल से लोकसभा विंध्यप्रदेश की संभावनाओं के परीक्षण में ही जुटी है।
-विंध्यप्रदेश का पुनरोदय पुण्यस्मरणीय जगदीश जोशी, यमुना प्रसाद शास्त्री, श्री निवास तिवारी का सपना था। ये तीनों अपने सीने में इस सपने को जज्ब किए इस लोक से प्रस्थान कर गए।
-4 अप्रैल 2000 को श्रीयुत श्रीनिवास तिवारी की इस हुंकार को याद रखें..
“गंगा की तरंगों को अब कोई रोक नहीं सकता, विंध्यप्रदेश हमारा हक है और उसे लेके रहेंगे”