चन्द्र बाबू बनेंगे एन डी ए के संयोजक

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नई दिल्ली – तेलुगू देशम पार्टी एनडीए में शामिलहोने जा रही है और उसके नेता चन्द्रबाबू नायडू एन डी ऐ के संयोजक होंगे टीडीपी के साढ़े आठ साल बाद एनडीए में लौटने की औपचारिक घोषणा जल्द ही होगी। बीजेपी के एक नेता ने बताया कि चंद्रबाबू नायडू 2 अक्टूबर को दिल्ली में मोदी के साथ मंच भी साझा करेंगे।मशहूर अंगरेजी दैनिक इकोनॉमिक्स टाइम्स में उनके संवाददाता पी रमेश की खबर के मुताबिक अगर नायडू बीजेपी के साथ आ जाते हैं, तो यह मोदी के लिए निजी तौर पर भी बड़ी सफलता होगी। इससे वह पार्टी के भीतर और बाहर उन लोगों को जवाब दे पाएंगे जो कहते रहे हैं कि उनकी हिंदुत्ववादी छवि की वजह से एनडीए को नए दोस्त नहीं मिल पाएंगे।
वैसे अभी नैदू इस बारे में खुल कर कुछ नहीं बोल रहे है पर उन्होंने कहा की , ‘देश में स्थिरता, नीति में स्पष्टता और निवेशकों के मन में विश्वास लाने के लिए केंद्र में सत्ता परिवर्तन जरूरी है। कांग्रेस देश को जाति, धर्म और क्षेत्र के नाम पर बांट रही है। देश और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए हमें एक स्थिर सरकार की जरूरत है।’
अखबार के अनुसार नायडू शनिवार को अकाली दल के सांसद नरेश गुजराल के घर हुई मीटिंग में भी मौजूद थी। इस मीटिंग में 2014 के आम चुनाव से पहले कांग्रेस विरोधी मजबूत प्लैटफॉर्म तैयार करने को लेकर चर्चा हुई। इसमें बीजेपी की ओर से अरुण जेटली और इंडियन नैशनल लोकदल (आईएनएलडी) की ओर से अभय चौटाला मौजूद थे।
अख़बार ने लिखा है कि घटनाक्रम से जुड़े एक जानकार ने बताया कि सीपीएम के प्रकाश कारत और जेडी (यू) के शरद यादव से बातचीत में भी नायडू ने तीसरे मोर्चे के सुझाव को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस विरोधी वोटों को एकजुट करने के लिए एक बैनर तले आना चाहिए। उन्होंने इन नेताओं के सामने अपनी पार्टी का रुख साफ-साफ रख दिया है।
एनडीए का कुनबा बड़ा करने में लगे मोदी ने झारखंड में बाबूलाल मरांडी, कर्नाटक में बीएस येदयुरप्पा और असम में एजीपी के प्रफुल्ल महंता से बात की है। बताया जा रहा है कि मरांडी के साथ बात बन सकती है, लेकिन इसके लिए बीजेपी को वहां उनके नेतृत्व में अगला चुनाव लड़ना पडे़गा। माना जा रहा है कि ऐसी स्थिति में राजनाथ सिंह के खास माने जाने वाले अर्जुन मुंडा को राज्य की राजनीति से बाहर लाना पड़ेगा।