नागरिकता संशोधन बिल = असम में जबरदस्त उबाल, डिब्रूगढ़ में सेना बुलाई गयी

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गुवाहाटी = नागरिकता संशोधन विधेयक पर असम में इस बिल का जबरदस्त विरोध हो रहा है। प्रदर्शन के दौरान राज्य सचिवालय के पास छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले भी दागे। प्रदर्शन को बढ़ता देख डिब्रूगढ़ में सेना बुला ली गई है। इस बीच कई ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया गया है, या फिर उनके रास्ते बदल दिए गए हैं। कई ट्रेनों के टाइम-टेबल में भी बदलाव किया गया है।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुभानन चंदा ने एक बयान में कहा कि कम से कम 14 ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया गया है या गंतव्य स्थान से पहले ही रोक दिया गया है या फिर ट्रेन परिचालन में बाधा को देखते हुए उनके रास्ते बदल दिए गए हैं। अवध असम एक्सप्रेस को न्यू तिनसुकिया से चलाने का निर्णय लिया गया है। यह डिब्रूगढ़ और न्यू तिनसुकिया के बीच रद्द रहेगी। वहीं, लीडो गुवाहाटी इंटरसिटी एक्सप्रेस, डिब्रूगढ़ फरकाटिंग गुवाहाटी इंटरसिटी एक्सप्रेस, नाहरलागुन तिनसुकिया इंटरसिटी एक्सप्रेस, डेकारगांव डिब्रूगढ़ इंटरसिटी एक्सप्रेस पूरी तरह से रद्द है।
लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पास होते ही नॉर्थ ईस्ट समेत देश के कई हिस्सों में इसका विरोध शुरू हो गया है। मंगलवार को गुवाहाटी में 12 घंटे का बंद बुलाया गया। कई जगहों पर प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरे तो कई जगह सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।गुवाहाटी में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के नेतृत्व में मशाल जुलूस निकाला गया। तमाम छात्र संगठन इस बिल के विरोध में उतर आए हैं।
गुवाहाटी में हजारों की संख्या में प्रदर्शन करने उतरे छात्रों ने पारंपरिक ढोल बजाकर बिल का विरोध किया। बता दें कि असम के 90 प्रतिशत से ज्यादा क्षेत्रों पर यह बिल लागू होगा।नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन के नेतृत्व में छात्र सड़कों पर उतरे और सड़कों पर टायर जलाकर रास्ते बंद कर दिए। इतना ही नहीं इन प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर पेड़ काटकर रास्ते पर गिरा दिए और रास्ते बाधित कर दिए।
असम के गुवाहाटी में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के पुतले फूंके। स्थानीय लोग बिल को लेकर जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं और इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं।बिल के विरोध में कांग्रेस के अलावा लेफ्ट पार्टियां भी लगातार आवाज उठा रही हैं। मंगलवार को लेफ्ट के सांसदों ने संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास खड़े होकर अपना विरोध जताया। इन लोगों ने हाथ में कुछ पेपर्स लिए थे, जिनपर लिखा था- धर्म के आधार पर भेदभाव बंद करो।
प्रदर्शन के दौरान राज्य सचिवालय के पास छात्रों के एक बड़े समूह और पुलिस के बीच झड़प हुई। सभी दिशाओं से बड़ी संख्या में छात्रों को सचिवालय की ओर बढ़ते देखा गया। वहीं, एक अन्य समूह गणेशगुरी क्षेत्र तक पहुंच गया, जहां सचिवालय सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर है। छात्रों ने जीएस रोड पर अवरोधक को तोड़ दिया, जिसके बाद पुलिस ने लाठी चार्ज किया। छात्रों पर आंसू गैस के गोले भी दागे गए, जिसे उठाकर छात्रों ने पुलिसकर्मियों पर फेंक दिया।
छात्रों ने बताया कि उनमें से कई लाठीचार्ज में घायल हो गए। उन्होंने कहा, ‘सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में बर्बर सरकार है। जब तक सीएबी वापस नहीं लिया जाता है, तब तक हम किसी दबाव में नहीं आएंगे।’ गुवाहाटी के अलावा डिब्रूगढ़ जिले में प्रदर्शनकारियों की झड़प पुलिस से हुई और पत्थरबाजी में एक पत्रकार घायल हो गया।
बिल का विरोध कर रहे ऑल असम स्टूडेंट यूनियन ने कहा है कि वह इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा। एएएसयू के मुख्य सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य ने केंद्र की बीजेपी सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उत्तर पूर्व के लोग इस विधेयक को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, ‘हम लोग नागरिकता संशोधन विधेयक से लड़ने के लिए कानूनी रास्ता अपनाएंगे। हमने अपने वकीलों से बात की है और हम उनकी सलाह पर सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।’ लोगों के प्रदर्शन और भारी भीड़ को देखते हुए असम के डिब्रूगढ़ में भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। पुलिस ने बताया कि स्थिति पर काबू पाने के लिए डिब्रूगढ़ में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर रबड़ की गोलियां चलाईं और लाठीचार्ज भी किया। उन्होंने बताया कि डिब्रूगढ़ शहर में एक पॉलिटेक्निक संस्थान के निकट प्रदर्शकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। हालांकि, बुधवार को किसी भी संगठन ने बंद नहीं बुलाया है।
जोरहाट, गोलाघाट, डिब्रूगढ़, तिनसूकिया, शिवसागर, बोंगाईगांव, नगांव, सोनीतपुर और कई अन्य जिलों में सुबह लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर निकले। अधिकारियों ने बताया कि सड़कों पर टायर जलाए गए हैं। वाहनों और ट्रेन की आवाजाही रोकने के लिए सड़कों और पटरियों पर लकड़ियों के कुन्दे रख दिए गए हैं। डिब्रूगढ़ में चौलखोवा में रेलवे पटरियों और सड़कों से प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज भी किया। जिले के मोरन में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और रबड़ की गोलियां चलाई गई।