जाया बच्चन संसद में बोली, रेपिस्टों को भीड़ के हवाले कर देना चाहिए

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नई दिल्ली = हैदराबाद में महिला वेटनरी डॉक्टर की रेप मामले की गूंज संसद में भी सुनाई दी। दोनों सदनों में सभी दलों के सदस्य इस जघन्य कांड पर बेहद आक्रोशित नजर आए। सांसदों ने दोषियों को जल्द से जल्द फांसी के लिए कानून को और कड़ा करने की वकालत की।
राज्यसभा में तो समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन तो इस घटना से इस कदर आक्रोशित थीं कि उन्होंने बलात्कारियों को भीड़ के हवाले कर डालने का सुझाव दे डाला। राज्यसभा के सभापति जया के इस सुझाव से थोड़ा हैरान नजर आए। वहीं, एआईएडीएमके की सांसद विजिला सत्यानंद चर्चा के दौरान भावुक हो गईं। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि देश बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं रहा। उधर, लोकसभा में सदन के उपनेता और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार दोषियों को फांसी दिलाने के लिए कानून को और कड़ा करने के लिए तैयार है।
राज्यसभा में सभापति वेंकैया नायडू ने कहा कि इस तरह की अमानवीय घटना से कानून के जरिए नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति से निपटा जा सकता है।उन्होंने कहा, ‘उम्र को लेकर भी सबको विचार करना चाहिए। कई लोग हैं जो कहने लगते हैं कि आरोपी नाबालिग है। जो दुष्कृत्य और अपकृत्य कर सकता है, उसका उम्र से क्या लेना-देना है?’ कुछ सांसदों ने मेजें थपथपाकर सभापति के इस सुझाव का समर्थन किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि बलात्कार जैसी हैवानियत पर रोक लगाने में नए-नए कानूनों की जगह राजनीतिक इच्छाशक्ति ही कारगर हो सकती है। उन्होंने कहा कि अभी फास्ट ट्रैक कोर्ट से भी सजा मिलती है तो अपील पर अपील करने के चलन के कारण मुजरिम बचता चला जाता है। उन्होंने कहा, ‘फास्ट ट्रैक के बाद भी अपील पर अपील की इतनी लंबी प्रक्रिया है कि सब खत्म हो जाता है। क्या ऐसे लोगों पर दया करनी चाहिए? और कोर्ट से सजा मिलने के बाद राज्य सरकार, फिर केंद्र सरकार, फिर गृह मंत्रालय और फिर राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजने की व्यवस्था क्यों है?’
राज्यसभा में चर्चा के दौरान एसपी सांसद जया बच्चन अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं और बेहद कड़ी टिप्पणी कर दीं। उन्होंने सभापति वेंकैया नायडू से मुखातिब होते हुए कहा कि ऐसे अपराधियों को भीड़ के हवाले कर दिया जाना चाहिए और उन्हें लिंच कर देना चाहिए। जया के इस सुझाव पर सभापति असहज भी हो गए और उन्होंने ‘लिंच्ड’ शब्द पर हैरानी जताई।
जया ने कहा कि इस तरह के अत्याचार पर सदन कितनी ही बार चर्चा कर चुका है। उन्होंने कहा, ‘पता नहीं कि हम कितनी बार इस पर चर्चा करते हैं। हैदराबाद हुआ, निर्भया हुआ, कठुआ हुआ। मुझे लगता है कि इस पर सरकार से इस पर सवाल पूछा जाना चाहिए और उन्हें इस पर सटीक जवाब देना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘इस बार सरकार से पूछा जाना चाहिए कि क्या हुआ, उन्होंने इससे कैसे टैकल किया और इसमें इन लोगों को अब तक कितना न्याय मिला है?’ जया ने हैदराबाद की घटना में वहां सुरक्षा-व्यवस्था में लगे लोगों की कोताही का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह जो घटना हैदराबाद में हुई, उससे पहले दिन भी उसी जगह एक हादसा हुआ। क्या वहां के जो सिक्यॉरिटी इनचार्ज हैं, क्या आपको नहीं लगता है कि उनसे सवाल करना चाहिए कि वह इलाके को सुरक्षित क्यों नहीं कर सके? इन लोगों को पूरे देश के सामने शर्मिंदा करना चाहिए, ये लोग अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं।’