शर्म है कि आती नहीं…

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राघवेंद्र सिंह

इन दिनों भोपाल से लेकर दिल्ली और दिल्ली से महाराष्ट्र तक मानो लोगों ने शर्म बेच खाई हो। ऐसा हो रहा है सगाई किसी के साथ हो रही है और बाद में लड़का या लड़की किसी और के साथ भाग रहा है। रिलेशन में अब लिव इन से भी ऊपर का मामला है। साथ फेरे किसी के साथ और बच्चे की वल्दियत किसी और की। गांव में एक कहावत है – तेल जले बाती जले नाम दीया का होय, लल्ला खेले काहू को और नाम पिया का होय… समाज,सियासत और नौकरशाही पटरी छोड़ पगडंडियों पर सरपट दौड़ रही है। कोई नैतिकता नहीं और कोई ईमानदारी नहीं। ऐसा लगता है सत्ता से सड़क तक लूटो खाओ और हाथ मत आओ की कुनीति पर सब कुछ चल रहा है। इस तरह की जितनी बातें जुमले और कहावतें ढ़ूढ़ी जाएं वे सब देश के वर्तमान परिदृश्य पर कम ही लगती हैं।
हम सज्जनता ईमानदारी और नैतिकता के अतिरेक पर नहीं जा रहे हैं। मगर जो सीन सत्ता और सियासत का दिख रहा है उसमें अगर अब कोई पार्टी और नेता दस साल से ज्यादा हुकूमत करे तो लगता है वह रावण,कंस और भक्त प्रहलाद के पिता हिरणाकश्यप की भांति खुद को भगवान घोषित कर मंदिर में मूर्ति स्थापित करने लगें तो हैरत नहीं होगी। कुछ पागल टाईप के भक्त तो यदा कदा ऐसा कर भी देते हैं। नौकरशाही के खुदा होने के वैसे तो बहुत से नमूने मिल जाएंगे, लेकिन भाजपा की शिवराज सरकार में जिन लोगों ने नग्न नृत्य किया उनमें से कुछ के चेहरों से आहिस्ता आहिस्ता नकाब सरक रही है। यहां एक बात बता दें मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास इतिहास पुरुष के रूप में स्थापित करने का हनी ट्रेपकांड के रूप में एक ऐसा अवसर है जिससे वे भारतीय राजनीति में अपने सारे पाप धो सकते हैं। वे भी संयोग से हाथ आए हनीकांड के अय्याशों और कुकर्मियों को निर्वस्त्र कर राजनीति के क्षितिज पर धूमकेतू की तरह चमक सकते हैं। हनीकांड में पकड़ी गई विषकन्या श्वेता के परागकणों से जिस रस को चूसने की बातें जितनी निर्लज्जता से सुयोग्य कुमार मिश्रा की बातें वायरल हुईं हैं वह जिम्मेदारों के लिए चुल्लूभर पानी में डूब मरने के लिए काफी हैं। लेकिन सबको पता है अब कोई शर्म से मरता नहीं है, क्योंकि शर्म है कि आती नहीं है…सुयोग्य मिश्रा सियासी और प्रशासनिक गलियारों में एसके मिश्रा के नाम से मशहूर रहे हैं। शौहरत दौलत और नौकरशाही में जो रसूख शिवराज सिंह चौहान अता फरमाया था वो बहुत कम मुकद्दर वालों को हासिल होता है। कमलनाथ और उनकी सरकार के पास ऊपर वाले ने उन्हें ये मौका ठीक वैसे ही दिया है जैसे छह महीने की मेहनत ने नाथ पहले प्रदेश अध्यक्ष बने और उसके बाद मुख्यमंत्री के सिंहासन पर आसीन हो गए। कम मेहनत और यकायक मुख्यमंत्री की कुर्सी कमलनाथ को मिली है तो मजहबी और रुहानी ताकतों में भरोसा रखने वाले आध्यात्मिक लोग ये जरूर मानते हैं कि भगवान आपातकाल में इंदिरा गांधी के तीसरे बेटे बने इस नेता से कोई बड़ा काम होने वाला है। हो सकता है कि इसकी शुरूआत हनीकांड के जरिए राजनीति पर प्रशासनिक सफाई अभियान से हो। हो सकता है इसमें कांग्रेस के भी कुछ प्लेब्याय किस्म के नेता धुल जाएं और भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री की पूंछ के साथ मूंछ का बाल रहे अय्याश अफसर नंगे हो जाएं। ऐसा हो सका तो अगले दस बीस साल मध्यप्रदेश कमलनाथ का आभारी रहेगा। क्योंकि एक बार की सफाई के बाद कचरा मलवा इकट्ठा होने में एक दो दशक तो बीत ही जाएंगे। एसके मिश्रा और श्वेता जैन के बीच का संवाद बहुत ही बाजारू और बेहद शर्मनाक है। पहले भी इस तरह के वाक्ये सत्ता साकेत में घटित हुए होंगे लेकिन मिश्रा श्वेताकांड ने अब तक के सारे रिकार्ड ध्वस्त कर दिए। पता नहीं इन घटनाओं को मिश्रा और उनसे जुड़े आका साथ में नाथ सरकार के कर्ताधर्ता किस ढंग से लेते हैं। लेकिन नौकरशाही और राजनीति में एक ऐसा काला अध्याय है जो जब जब बेहया और आवारा हुस्न के साथ हुक्मरानों की बात आएगी तब श्वेता मोनिका आरती एसके मिश्रा पीसी मीणा की चर्चा होगी।
गौरतलब है कि हनीकांड में डेढ़ सौ लोगों की सीडी,पैनड्राइव है। इनमें राजनेता, अधिकारी, व्यापारी,बिल्डर और मीडिया हाऊस के स्वनामधन्य मालिक और मीडिया कर्मी शामिल हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय तो पत्रकारों से चर्चा में कह भी चुके हैं कि कुछ नाम तो उनके पास भी हैं। जब सरकार से बाहर रहने वाली पार्टी के नेता के पास नाम हैं तो हनीकांड में शामिल लोगों के नाम जितना देर से उजागर होंगे कमलनाथ और उनकी सरकार को प्रतिदिन के हिसाब से नुकसान होगा। पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा को भी एक वीडियो विषकन्या के साथ मदिरापान करते हुए वायरल हुआ है। उसमें भाजपा नेताओं में प्रधानमंत्री से लेकर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री उनके परिजनों के साथ संघ परिवार के नेताओं पर भी लांछन लगाए गए हैं। इस पर परेशान लक्ष्मीकांत की सफाई भी आई है। कुल मिलाकर कमलनाथ के पास आपातकाल और सिख दंगे के दौरान उनपर लगे आरोपों से अलग हट राजनीति को पाक साफ करने का मौका आया है। पुलिस प्रशासन में भी एक बड़े सफाई अभियान की जरूरत है।सिपाही से लेकर कप्तानों तक वर्दियों के दागदार होने की खबरें हैं। साथ ही पटवारी से लेकर प्रमुख सचिव स्तर तक भ्रष्टाचार के किस्से आम हैं।मैदानी चर्चाओं पर भरोसा करें तो रेत के लुटेरों से सबका हफ्ता और महीना बंधा हुआ है। कम से कम भोपाल,इंदौर,ग्वालियर,जबलपुर में तो प्रशासनिक अमला ऐसा हो जो दूसरों के लिए मिसाल बन सके। शुरुआत भोपाल से हो तो भी तसल्ली लायक बात हो जाएगी।
गणेश के महाराष्ट्र में झुकता शिवाजी का सिर….
गणेशजी बुद्धि के साथ रिध्दि सिध्दि के दाता हैं। लेकिन पिछले दिनों जो हुआ उससे ऐसा लगता है महाराष्ट्र के नेताओं के दिमाग का दीवाला निकल गया है। चुनाव पूर्व गठबंधन भाजपा का शिवसेना से। उधर एनसीपी का कांग्रेस से। लेकिन चुनाव के बाद शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस से गठबंधन कर रही है। इधर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी भाजपा एनसीपी को रातों रात तोड़कर सुबह आठ बजे सरकार बना लेती है। इसके पहले देवेन्द्र फणवीस का पुराना बयान है बीजेपी कभी भी एनसीपी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। हम उनके भ्रष्टाचार को विधानसभा में उजागर करेंगे। और इसके बाद फणवीस ने मुख्यमंत्री की शपथ ली और एनसीपी के अजित पवार डिप्टी सीएम बन गए। एक तरह से गणेशजी को मानने वाले महाराष्ट्र में नैतिकता के मुद्दे पर नेताओं की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है। शिवाजी के इस राज्य की सियासत में छत्रपति का मान भी कम हुआ है। हो सकता है आज के नेता कहें कि सत्ता ही सर्वोपरि है पर भाजपा के आदिपुरुष अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि अनैतिकता से मिलने वाली सत्ता हासिल करना तो दूर उसे वे चिमटे से पकड़ना भी पसंद नहीं करेंगे।