उद्धव ने मेरा फोन तक नहीं उठाया, गतिरोध के लिए शिवसेना जिम्मेदार

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मुंबई = महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद बीजेपी और शिवसेना खुलकर एक-दूसरे के खिलाफ हमला बोल रहे हैं। इस बीच शिवसेना ने एक बार फिर एनसीपी और कांग्रेस से सरकार गठन के लिए बातचीत शुरू कर दी है। इस्तीफा देने के बाद फडणवीस ने बोले, ‘दुखद यह है कि उन्होंने कांग्रेस और एनसीपी नेताओं से बातचीत और मुलाकात शुरू कर दी है। मुझे इस बात का बेहद दुख है कि मेरे इतनी कोशिश के बाद भी उद्धव ने मेरा कॉल नहीं उठाया। वर्तमान गतिरोध के लिए शिवसेना 100 फीसदी जिम्मेदार है।’
हालांकि इस बीच फडणवीस ने यह भी कहा कि सेना से मित्रता के दरवाजे खुले हैं और अगली सरकार बीजेपी के नेतृत्व वाली होगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी शिवसेना के साथ इसी शर्त पर बात शुरू करेगी कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे नेताओं पर संजय राउत और सामना के जरिए हमले करना रोक दे।
उधर, खरीद फरोख्त के डर से शिवसेना ने अपने विधायकों को बांद्रा के रंगशारदा होटल से माध आइलैंड के किसी रिजॉर्ट में 15 नवंबर तक शिफ्ट कर दिया है। इसी तरह कांग्रेस ने भी अपने विधायकों को जयपुर के एक रिजॉर्ट में बीजेपी की खरीद-फरोख्त से डरते हुए शिफ्ट कर दिया है।
सेना ने महाराष्ट्र के डीजीपी सुबोध जायसवाल से अपने विधायकों और पार्टी को समर्थन देने वाले निर्दलीय विधायकों के लिए सुरक्षा मांगी है। हालांकि फडणवीस ने जोड़-तोड़ कर सरकार बनाने की बात से इनकार किया और कहा कि उन्हें भरोसा है कि स्थिर सरकार सत्ता में आएगी।
निवर्तमान विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वेडट्टीवार ने बीजेपी पर कांग्रेस और सेना के विधायकों को 25 से 50 करोड़ रुपये का ऑफर देने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘सत्ताधारी पार्टी के कुछ लोगों पिछले कुछ समय से हमसे लगातार संपर्क कर रहे हैं और उत्पीड़न कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हमने अपने विधायकों को टेलिफोन कॉल रेकॉर्ड करने के लिए कहा है। कुछ वरिष्ठ कैबिनेट नेता भी खरीद-फरोख्त में शामिल हैं।’
हालांकि कांग्रेस के मुंबादेवी से विधायक अमीन पटेल मुंबई में ही रुके हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं ईद-उल-मिलाद की वजह से नहीं गया। उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, अशोक चव्हाण, पृथ्वीराज चव्हाण और सुशीलकुमार शिंदे एक सिटी होटल में मुलाकात की।’ मीटिंग में शामिल एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘हम अयोध्या पर फैसला आने के बाद ही कोई निर्णय लेंगे क्योंकि सेना इसे सेलिब्रेट करने वाली है।’
एक बीजेपी नेता ने कहा कि महाराष्ट्र में एक महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लग सकता है और इससे सेना के विधायक अपने नेतृत्व पर बीजेपी के साथ समझौते के लिए दवाब बनाएगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार जल्द ही सत्ता में लौट जाएगी।