चट्टानों में फंसे बाघ को बचाया नहीं जा सका

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चंद्रपुर = महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में स्थित एक शिरना नदी में फंसे घायल बाघ को 24 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी बचाया नहीं जा सका। आखिरकार उसकी मौत हो गई। वन विभाग ने गुरुवार को बाघ की मौत की पुष्टि की। बताया जा रहा है कि बुधवार को 35 फीट ऊंचे पुल से छलांग लगाने पर बाघ को रीढ़ की हड्डी में चोट आ गई थी। वह कुनाडा गांव के पास सिरना नदी में चट्टान के बीच फंसा हुआ नजर आया।
बुधवार सुबह बाघ ने पुल से छलांग लगाई थी जिसके बाद वह पथरीली चट्टानों पर गिर गया था। बताया जा रहा है कि चट्टानों पर गिरने से उसकी रीढ़ की हड्डी में चोट आ गई थी। हालांकि फिर भी उसने हिम्मत करते हुए खुद से चट्टान से निकाल लिया और नदी के पानी में चला गया। बाघ को नदी में देखकर पुल पर कई लोग इकट्टा हो गए। सूचना पाकर वन विभाग की टीम भी पहुंची और बाघ को बचाने का प्रयास किया।
मुंबई मिरर की खबर के मुताबिक टीम ने बाघ को बचाने के लिए पिंजड़ा उसके करीब गिराया लेकिन कामयाबी नहीं मिली। एक वन अधिकारी ने बताया, ‘बाघ को बचाने के कई प्रयास किए गए। इसके लिए बाघ के पास नदी में पिंजड़ा भी उतारा गया लेकिन बाघ इसके अंदर जाने में असफल रहा। पिंजड़े को खींचने की कोशिश में बाघ के दांतों में भी चोट आ गई।’ चंद्रपुर सर्कल के मुख्य वन संरक्षक एसवी रामाराव ने बताया, ‘गुरुवार सुबह नदी में फंसे बाघ की मौत हो गई।’ बुधवार को बाघ ने एक जंगली जानवर का शिकार किया था जिसके बाद वह पुल पर आराम कर रहा था। इसके बाद उसने पुल से छलांग लगाई और घायल हो गया। सूचना पाकर वन अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। रात में अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिया गया।
अधिकारी ने बताया, कुछ वनकर्मी बाघ की गतिविधियों की रातभर निगरानी करते रहे। लेकिन गुरुवार सुबह बाघ के शरीर में कोई हरकत नहीं दिखी। बाघ के शव को पानी से बाहर निकाला गया। उन्होंने कहा कि मौत की असली वजह पोस्टमॉर्टम के बाद ही पता चलेगी।