हे नाथ बिजली निर्बाध कर दो….

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ज़हीर अंसारी
मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद बिजली की आवाजाही बहुत बढ़ गई है। कब बिजली आपूर्ति बाधित हो जाए इसकी कोई गारंटी नहीं है। ग्रामीण इलाक़े की बात छोड़ दीजिए शहरों क्षेत्रों में बिजली की निर्बाध आपूर्ति बाधित हो रही है। हवाएँ ज़रा सा कड़क हुई तो बिजली गोल हो जाती है।
सरकार के मुखिया कमलनाथ का एक बयान था कि प्रदेश में बिजली इतनी सरप्लस है कि आदिवासी क्षेत्रों में मुफ़्त बिजली दी जा सकती है। फिर क्या कारण है कि सरकार बनने के छः माह बाद भी निर्बाध बिजली का टोंटा पड़ा हुआ है। किसानों और ग्रामीण अंचलों को निर्धारित मापदंड के अनुसार बिजली नहीं मिल रही है। शहरों में पावर ट्रिपिंग का मामूल बना हुआ है। प्रदेश के बिजली मंत्री भी विद्युत वितरण व्यवस्था सुचारू करने में नाकाम रहे। बिजली के तार गर्मी की कभी-कभार वाली अंधड़ नहीं झेल पा रही तो वर्षाकाल में तेज़ बारिश और हवा का सामना कैसे करेगी।
बिजली की ट्रिपिंग पर ज़िम्मेदार अफ़सर बड़ा ही बचकाना जवाब देते हैं। कभी कहते हैं कि चायनीज मंझा (पतंग वाला) तारों से उलझ गया तो कभी कहते हैं कि गिलहरी फँस गई। इसलिए ट्रिपिंग हो रही है। कोई यह नहीं कहता कि मेंटेनेंस की मलाई डकार ली गई है, वितरण कम्पनी के पास लाईनमैन की अत्याधिक कमी है।
कमलनाथ जी अब सरकार की कमान आपके हाथ है। आप यह कहकर बच नहीं सकते कि पूर्ववर्ती सरकार का ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है। आप माने या न माने पर यह सच्चाई है कि बिजली सप्लाई में हुई कोताही का नुक़सान लोकसभा के चुनाव परिणाम में कांग्रेस को उठाना पड़ेगा। क्योंकि बिजली की आवाजाही पर कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार से जोड़कर काफ़ी छींटाकशी हुई है।
अब आपकी सरकार लोकसभा चुनाव से पूरी तरह फ़ारिग़ हो चुकी है। अब आपकी सरकार पूरा ध्यान पेय जल, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य की तरफ़ होना चाहिए। ये चारों ज़रूरतें हर वर्ग को पड़ती हैं। यही व्यवस्थाएँ सरकार को लोकप्रिय अथवा अलोकप्रिय बनाती है।