चुनाव आयोग फिल्म देखकर बताये की फिल्म बेन किया जाना है या नहीं

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नई दिल्ली = फिल्‍म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि यह फिल्म देखकर फैसला करें कि फिल्म को बैन किया जाना है या नहीं, फिल्म देखने के बाद 22 अप्रैल तक अपना पक्ष सीलबंद कवर में कोर्ट में जमा करें। फिल्‍म ‘ के निर्माताओं की ओर से उनके वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में दलील दी किआयोग ने बिना फिल्म देखे, फिल्म को बैन करने फैसला कर दिया है।
फिल्म की ओर से किए गए इस दलील के बाद कोर्ट ने आयोग को कहा है कि फिल्म देखकर वह अपना पक्ष सीलबंद कवर में कोर्ट में जमा करवाएं। ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीवनी पर बनी है। चुनाव के दौरान फिल्‍म की रिलीज को लेकर विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया था। यह फिल्‍म पहले 5 अप्रैल और बाद में 11 अप्रैल को रिलीज होने वाली थी, लेकिन विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग में शिकायत के बाद फिल्‍म की रिलीज डेट टल गई।
फिल्म के मेकर्स ने कहा, ‘भारत के सभी नागरिकों को न्याय के लिए अपील करने का अधिकार है और एक निर्माता के तौर पर हम वही कर रहे हैं। यह फिल्म हम सबके लिए विशेष है और हम चाहते हैं कि दुनिया इसे देखे। 10 अप्रैल को फिल्म के प्रीमियर से कुछ घंटे पहले चुनाव आयोग द्वारा फिल्म पर पाबंदी लगाने की नोटिस पाकर हम चौंक गए थे। हम देश की सर्वोच्च न्यायालय से इस फिल्म को रिलीज करने की इजाजत देने की अपील कर रहे हैं। न्यायालय का जो भी आदेश होगा, हम उन सभी नियमों और निर्देशों का पालन करेंगे, हम कानून के विरुद्ध नहीं जाएंगे।’
चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित इस फिल्म पर चुनाव आचार संहिता लागू होने का हवाला देते हुए रोक लगा थी। विपक्षी दलों की शिकायत पर आयोग ने इसके प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। शिकायत में कहा गया है कि मोदी पर आधारित बायॉपिक को चुनाव के दौरान प्रदर्शित करने का मकसद बीजेपी को चुनावी फायदा पहुंचाना है, इसलिए चुनाव के दौरान इसके प्रदर्शन की अनुमति देने से चुनाव आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन होगा।