युवाओं की भूमिका होगी इस बार के सांसद चुनने में

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संजय साहू

जबलपुर मध्य प्रदेश= लोकतंत्र का महापर्व कहे जाने वाले लोकसभा का चुनावी बिगुल बजने के बाद जबलपुर लोकसभा क्षेत्र में भी हलचल अपने शबाब पर पंहुचती जा रही है प्रशासनिक अमला भी सक्रिय हो गया है। प्रमुख राजनैतिक दाल बीजेपी के राकेश सिंह और कांग्रेस के विवेक तन्खा तपती धूप में घर घर जाकर अपने लिए वोट मांग रहे है लोकसभा क्षेत्र में इस बार रिकार्ड 17.87 लाख वोटर अपने मतों का प्रयोग करके संसद सदस्य को चुनेगें जिसमें युवाओं की तादाद सबसे ज्यादा है। इसमें 76 हजार के लगभग नए मतदाता है, जो पहली बार लोकसभा में वोट डालेंगे। महिलाओं के साथ युवा मतदाता निर्णायक की भूमिका में रहेंगे।जबलपुर का इतिहास संसदीय सीट के हिसाब से बेहद रोचक रहा है
. 1996 से लगातार जीत रही भाजपा
अब तक हुये चुनावों में एक समय जबलपुर संसदीय क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ माना जाता था किन्तु परिस्थितियां बदली और 1991 में कांग्रेस के श्रवण भाई पटेल ने लोकसभा में जीत दर्ज की थी। इसके पश्चात 1996 से लगातार यहां पर भाजपा जीतती चली आ रही है। जिसमें तीन बार से निरंतर वर्तमान सांसद व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह का कार्यकाल भी शामिल है।
29 अप्रैल को होगा चुनाव
29 अप्रेल को होने वाले मतदान की उलटी गिनती शुरू हो गयी है। दोनों प्रमुख पार्टियों के प्रत्याशी अपनी पूरी ताकत मतदाताओं को लुभाने में झोंक रहे है वायदों और सौगातों की पोटली खोली जा रही है जबलपुर लोकसभा के इतिहास की बात करें तो 1951 से अब तक महज एक बार ही यहां के लोगों ने महिला प्रत्याशी को विजयश्री दिलाकर श्रीमती जयश्री बनर्जी को संसद तक पहुंचाया है। इस सीट पर अब तक सात बार कांग्रेस काबिज रही है, तो आठ बार भाजपा सांसद चुने गए। जबलपुर लोकसभा इस मायने में भी अहम मानी जाती है कि 1974 में यहां से छात्र राजनीतिक में सक्रिय शरद यादव ने बड़ा उलटफेर करते हुए कांग्रेस की इस परंपरागत सीट को छीन लिया। फिर देश भर में कांग्रेस के खिलाफ बने माहौल में 1977 में भी भालोद से जीत दर्ज की।
हर बार बढ़ी जीत
2004 में भाजपा के युवा तुर्क राकेश सिंह ने लोकसभा चुनाव में जोरदार जीत दर्ज की थी। उन्होंने तत्कालीन महापौर कांगे्रस के विश्वनाथ दुबे को 99.5 हजार मतों से परास्त कर प्रथम जीत दर्ज की थी। इसके बाद वर्ष 2009 में कांग्रेस के रामेश्वर नीखरा को 1.06 लाख मतों से हराया था। इसके बाद उनकी जीत का अंतर बढ़ता ही गया। 2014 के आम चुनाव में राकेश सिंह ने कांग्रेस नेता विवेक तन्खा को 2.08 लाख मतों से हराकर रिकार्ड बनया था।
महिला मतदाता होंगी निर्णायक
2014 में हुए लोकसभा चुनाव आंकड़ों पर नजर डाले तो भाजपा-कांग्रेस के मतों में दो लाख का अंतर था। जबकि महिला मतदाता 8.13 लाख थी। भाजपा को तब 5.64 लाख और कांग्रेस को 3.55 लाख मत मिले थे। तीन महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में भी महिला मतदाताओं ने मतदान में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। जिले के 552 मतदान बूथों पर महिला मतदाता पुरुषों की तुलना में आगे रही।
जबलपुर संसदीय क्षेत्र की स्थिति-
कुल मतदाता- 17.87 लाख
पुरुष मतदाता- 9.24 लाख
महिला मतदाता- 8.62 लाख
थर्ड जेंडर-73
18 से 19 वर्ष के मतदाता- 34159
पुरुष मतदाता- 19290
महिला मतदाता- 14866
20 से 29 वर्ष के मतदाता- 4.18 लाख
पुरुष मतदाता- 2.21 लाख
महिला मतदाता- 1.96 लाख
पांच साल में बढ़े कुल मतदाता बढ़े-76,534
महिला मतदाता बढ़े-48,762

. 2014 के आईने में लोकसभा
कुल मतदाता-17.10 लाख
महिला मतदाता- 8.13 लाख
भाजपा को मिले मत-5.64 लाख
कांग्रेस को मिले मत-3.55 लाख

विधानसभा चुनाव 2018 में वोटिंग के आंकड़े
विधानसभा क्षेत्र- कुल वोटिंग- महिला मतदान – कुल मतदान केंद्र-
पाटन- 78.99- 77.03- 303
बरगी- 78.32- 75.75- 284
पूर्व- 67.55- 53.85- 224
उत्तर- 67.96- 65.38- 241
केंट- 65.95- 65.05- 213
पश्चिम- 65.71- 64.62- 275
पनागर- 75.08- 74.03- 306
सिहोरा- 75.96- 75.25- 282

जबलपुर लोकसभा संसदीय क्षेत्र से अब तक चुने गये सांसद
-1951 में जबलपुर उत्तर सीट से कांग्रेस के सुशील कुमार पटेरिया
-1951 में मंडला-जबलपुर दक्षिण सीट से पहले मंगरु गुरु उइके, उपचुनाव में सेठ गोविंददास
– 1957, 62, 67, 71 में लगातार कांग्रेस के सेठ गोविंददास जीते
-1974 में जबलपुर सीट पर छात्र राजनीति में सक्रिय रहे शरद यादव जीते
– 1977 में भी शरद यादव भालोद के टिकट पर जीते
– 1980 में कांग्रेस के मुंदर शर्मा सांसद चुने गए, उपचुनाव में भाजपा के बाबूराव परांजपे विजयी हुए
-1984 में कांग्रेस के अजय नारायण मुशरान जीते
– 1989 में बीजेपी के बाबूराव परांजपे चुने गए
-1991 में कांग्रेस के श्रवण कुमार पटेल सांसद चुने गए
– 1996 व 98 में बीजेपी के बाबूराव परांजपे लगातार सांसद चुने गए
-1999 में बीजेपी की जयश्री बनर्जी जीतीं
– 2004, 2009, 2014 से भाजपा के राकेश सिंह सांसद हैं