जबलपुर संसदीय सीट = दो हिस्सों में बँट गए हैं मतदाता

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जबलपुर मध्यप्रदेश = जैसे जैसे गर्मी अपनी तीव्रता बढ़ा रही है वैसे वैसे जबलपुर संसदीय सीट के चुनावें में भी गर्मी आती जा रही है दोनों ही प्रत्याशी तूफानी जनसम्पर्क में जुटे हुए है दोनों ही पार्टियों का फोकस ग्रामीण इलाकों में है सुबह से लेकर शाम तक प्रत्याशी विभिन्न गावों में बैठकों, और जनसम्पर्क के दौर से गुजर रहे है चूंकि अब वोटिंग के लिए कम दिन बचे है इसलिए दोनों ही पार्टियों के प्रत्याशी कम से कम एक बार संसदीय सीट के हर इलाके में अपनी उपस्थिति दर्ज करना चाहते है.
उल्लेखनीय है कि जबलपुर संसदीय सीटपर इस बार मुकाबला कांटे का है एक तरफ कांग्रेस से विवेक तन्खा अपनी किस्मत आजमा रहे है वंही दूसरी तरफ वर्तमान सांसद राकेश सिंह बीजेपी से मैदान में है 2014 के चुनाव में भी ये ही दोनों प्रत्याशी थे पर कांग्रेस को उस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था अपनी इस हार का बदला लेने के लिए कांग्रेस ने इस बार तगड़ी रणनीति अपनाई है और अपने मुद्दे स्थानीय कमियों को बनाया है कांग्रेस की तरफ से ये सवाल पूछे जा रहे है है की बीजेपी प्रत्याशी राकेश सिंह जो तीन बार के सांसद है ने अपने पन्दरह साल के कार्य काल में क्या किया, जबलपुर में न तो रोजगार के साधन उपलब्ध हो सके न कोई उद्योग ही लग सके ना तो जबलपुर पर्यटन हब बन पाया न ही जबलपुर को अच्छी स्वास्थ सेवाओं का लाभ मिला सका ये मुद्दे कांग्रेस प्रत्याशी विवेक तन्खा अपनी हर सभा में उठा रहे है वंही दूसरी तरफ बीजपी राष्ट्रीय मुद्दों के दम पर चुनाव लड़ने तैयार है बीजेपी एयर स्ट्राइक, सर्जिकल स्ट्राइक, देश द्रोह, राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों को सामने रख कर कांग्रेसस को आरोपों के घेरे में ले रही है बीजेपी के वर्तमान सांसद राकेश सिंह अपनी उपलब्धिया भी बतला रहे है कि बरसों से हवाई सेवाओं के लिए तरस रहे जबलपुर को हवाई सेवाएं उपलब्ध करवाई गयी, 750 करोड़ के फ्लाईओवर ब्रिज का भूमि पूजन भी राकेश सिंह अपने खाते में डाल रहे हैं रेल सेवाओं में बढ़ोतरी भी बीजेपी अपनी उपलब्धि बतला रही वैसे इस बार मतदाता का क्या मूड है ये समझ में नहीं आ रहा है क्योकि मतदाता मौन है और उसका मौन मतदान के दिन ही टूटेगा अब उसका वोट किसके हिस्से में आता है ये तो चुनाव के परिणाम आने के बाद ही सामने आ सकेगा पर मतदाता सीधे सीधे दो हिस्सों में बंटता हुआ दिखाई देता है एक तरफ मोदी के भक्त है तो दूसरी तरफ मोदी की मुखालफत करने वाले, जबलपुर अभी तक बीजेपी का गढ़ रहा है पर इस बार मुकाबला एक तरफा नहीं बल्कि फिफ्टी फिफ्टी का बन गया है क्योकि विवेक तन्खा के पास भी अपनी उपलब्धियां बताने के लिए बहुत कुछ है