सरकार कल्याणकारी योजनाओ को तार्किक बनायें राजन की सलाह

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नई दिल्ली =भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि राष्ट्रवाद और रोजगारपरक आर्थिक विकास, अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। मशहूर अंगरेजी दैनिक टाइम्स ऑफ इंडिया के लिए लिखे लेख में राजन ने कहा कि अगर आने वाले वर्षों में भारत बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा करने वाली आर्थिक वृद्धि हासिल नहीं करता है तो हमें कई मोर्चों पर पिछड़ना पड़ेगा।
उन्होंने लिखा, ‘हमारे पास सैन्य साजो-सामान के आधुनिकीकरण के साधन नहीं होंगे। हमारी इतनी आर्थिक क्षमता नहीं होगी कि दुनिया के देशों को इस बात के लिए राजी कर पाएं कि वे हम पर हमला कर कानून की गिरफ्त से भागे आतंकवादियों को गिरफ्तार कर उनका प्रत्यर्पण करें।’ राजन ने आगे कहा कि अगर हम रोजगापरक आर्थिक वृद्धि दर्ज नहीं कर सके तो देश के अंदर सियासी भूचाल आ जाएगी क्योंकि बेरोजगार युवा अपनी कुंठा निकालने लगेंगे। उन्होंने कहा, ‘रोजगार पैदा करने वाले आर्थिक विकास के बिना किसी भी देश की सार्थक राष्ट्रीय सुरक्षा संभव नहीं है।’
राजन ने अपने लेख में नौकरियां पैदा करने के उपाय भी बताए। उन्होंने कहा कि इसके लिए निःसंदेह हमें अपना विकास दर बढ़ाना होगा, खासकर नौकरियां देने वाले क्षेत्रों में। इसके लिए हमें नई पीढ़ी के सुधार लागू करने होंगे क्योंकि पुरानी पद्धति बेकार पड़ चुकी है। राजन ने कहा, सिर्फ कंस्ट्रक्शन सेक्टर से भारी संख्या में नौकरियां पैदा हो सकती हैं। किफायती घरों, सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और कमर्शल रियल एस्टेट के निर्माण से अर्धकुशल आबादी को बड़ी तादाद में नौकरियां मिल सकती हैं। लेकिन, जमीन अधिग्रहण की पेचीदा प्रक्रिया और सीमित कर्ज के कारण इस सेक्टर की गति अपेक्षित स्तर पर नहीं है। अगली सरकार को इन कमियों को दूर करना होगा। इसके अलावा, डिजिटल मैपिंग की बेहतर व्यवस्था और जमीन के मालिकाना हक से संबंधित कानून में बदलाव की जरूरत होगी। इससे जमीन की बिक्री के अलावा लीज पर जमीन देने की प्रक्रिया भी आसान होगी। इससे कई सीमांत किसान खेती को छोड़कर अपनी जमीन लीज पर देकर बदले में किराया पा सकते हैं।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर ने प्राइवेट सेक्टर में सुधारों की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि बैंक कंस्ट्रक्शन सेक्टर की कंपनियों को लोन देने में संकोच करते हैं। फाइनैंस कंपनियों ने यह कमी पूरी की, लेकिन अब वे खुद मुश्किल में फंस चुकी हैं। ऐसे में कंस्ट्रक्शन कंपनियों को खुद में सुधार लाना होगा। साफ-सुथरे कंस्ट्रक्शन सेक्टर को बैंकों से भी कर्ज मिलेंगे जिससे इस सेक्टर की काले धन पर निर्भरता खत्म हो जाएगी।
राजन ने कहा कि हमें साधनों की कमी को भी ध्यान में रखना होगा। सरकार को अपनी कल्याणकारी योजनाओं को भी तार्किक बनाना होगा ताकि बजट पर बहुत बोझ नहीं पड़े। हालांकि, अनिवार्य लक्ष्यों को कुशलता पूर्वक पूरा करना भी अनिवार्य होगा। राजने ने आखिर में लिखा, ‘अंत में, सतत विकास का कोई भी रास्ता सामाजिक शांति से होकर गुजरता है। कोई भी दल अगर एक बड़े नागरिक समूह को नजरअंदाज करता है तो यह सुनिश्चित हो जाता है कि हम न तो विकास करेंगे और न ही हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा में मजबूती आने वाली है। चूंकि हम चुनाव की ओर अग्रसर हैं, इसलिए हमारा सिर्फ एक मकसद होना चाहिए- सतत, नौकरियां पैदा करने वाली आर्थिक वृद्धि।’