*जिनके माथे से मेहनत का पसीना नहीं बहता, उनका जीवन कभी नगीना नहीं बनता*

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*सुरेन्द्र दुबे*
जबलपुर मध्यप्रदेश । एक वयोवृद्ध माता अपलक जबलपुर में स्थित मुनि सुव्रतनाथ भगवान की प्रतिमा को निहार रही थी। उसकी कमर झुकी हुई थी, गर्दन उठाने में तकलीफ हो रही थी। इसके बावजूद वह अपने शारीरिक कष्ट को भूलकर प्रभु की ओर एकटक निहारे चली जा रही थी। ब्रह्मचारी त्रिलोक जी ने उससे पूछा कैसा लग रहा है? यह सुनकर धर्मप्राण वृद्धा ने जवाब दिया-ऐसा लग रहा है, ऐसा लग रहा है, जैसा कभी नहीं लगा। मन कर रहा है कि भगवान को देखती रहूं, बस देखती ही रहूं। यही हाल पांडुचेरी से जबलपुर आए सोहनलाल पहारिया और अशोक जी का था, वे कह रहे थे ऐसा लग रहा है इस दिव्य-अलौकिक प्रतिमा को बस देखते रहें, देखते रहें, देखते रहें।

इधर दूसरी ओर गुरुकुल के परिसर में अधिष्ठाता ब्रह्मचारी जिनेश जी, नरेश जी और रवीन्द्र जी जिनालय की ओर एकटक देखते हुए परस्पर चर्चा कर रहे थे कि हमारा श्रम, हमारी मेहनत सार्थक हुई। पांच साल से जो पसीना हमारे माथे से बहा, वह अब इस बेजोड़ मंदिर के रूप में नगीना बनकर चमक रहा है। ब्रह्मचारियों का संवाद सुनकर लगा कि वाकई जिनके माथे से मेहनत का पसीना नहीं बहता, उनका जीवन कभी नगीना नहीं बनता।

*अब कुंडलपुर नहीं यहीं करूंगा सिद्धचक्र महामंडल विधान*- शहर के बाहर से आए एक धनाढ्य जैन धर्मावलंबी ने कहा कि मेरा जैन तीर्थ कुंडलपुर में सिद्धचक्र महामंडल विधान कराने का मन है, लेकिन जब से जबलपुर के मुनि सुव्रतनाथ भगवान की प्रतिमा के दर्शन किए, तब से मन कर रहा है कि अब सिद्धचक्र महामंडल विधान होगा तो यहीं होगा।

*रायपुर से आए दानदाता ने कहा मेरा जीवन और धन सार्थक हुआ*- छत्तीसगढ़ रायपुर से जबलपुर आए मंदिर निर्माण के दानदाता महेन्द्र चूड़ीवाले ने प्रफुल्लित-हर्षित और भाव-विभोर होकर कहा कि इस मंदिर के निर्माण में लगा मेरा धन सार्थक हो गया, इससे मेरा जीवन भी सार्थक हो गया। गुरुकुल परिवार को धन्यवाद, मेरा परिवार धन्य हो गया। प्रतिमा के दानदाता पनागर निवासी सुरेन्द्र कुमार कटंगहा स्मृतिशेष के पुत्रों राजेश कुमार व संजय कुमार ने प्रतिमा की ओर भावपूर्ण-मुद्रा में निहारते हुए कहा-हमारा पूरा परिवार धन्य हो गया।