तय हो गई जबलपुर में पहली कैबिनेट बैठक की तारीख़….

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ज़हीर अंसारी
मध्यप्रदेश के प्रमुख शहर जबलपुर की उपेक्षा का मामला जब तक उठता रहा है। यहाँ के पिछड़ेपन की गाथा भोपाल-दिल्ली में बैठने वाले बड़े नेताओं के सामने पढ़ी जाती रही है। फिर भी जबलपुर को उसकी हैसियत के मुताबिक़ अहमियत नहीं दी गई। इसकी वजह यह रही कि राजनैतिक दृष्टिकोण से जबलपुर की वज़नदारी कम आँकी जाती रही। पिछले तीन-चार दशक में एक भी क़द्दावर नेता नहीं हुआ जो जबलपुर को उसका वाजिब हक़ दिलवा सके। मलाई की जगह खुरचन से ही यहाँ के नागरिकों को तसल्ली करना पड़ती रही।

ऐसा बिल्कुल नहीं है कि जबलपुर के हिस्से में कुछ भी नहीं आया। भाजपा सरकार और यहाँ से चुने गए भाजपा जनप्रतिनिधियों ने अपनी क्षमता अनुसार कई उपलब्धियाँ इस शहर को दिलवाई है। इस कार्य में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका त्रिवारीय सांसद राकेश सिंह की रही है। इनके प्रयासों से हवाई सेवा, रेल सेवा और सड़क मार्गों के मामले में काफ़ी प्रगति हुई है। बावजूद इसके एक टीस यहाँ के नागरिकों में बनी रहती थी कि प्रदेश सरकार महाकोशल के सबसे बड़े शहर जबलपुर को पर्याप्त महत्व नहीं दे रही है। पिछले 15 साल प्रदेश में भाजपा की सरकार रही। भाजपा शासनकाल में अक्सर यह माँग उठती रही कि जबलपुर को उपराजधानी बनाया जाए। नहीं तो कम से कम प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठकें ही करवाई जाए। तत्कालीन भाजपा सरकार इन माँगों को एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल दिया करती थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिर्फ़ इतना किया कि सन 2008 में प्रदेश के उच्च अधिकारियों की एक बैठक कलेक्ट्रेट में कर जनता को संतुष्ट करने का प्रयास किया था। उसके बाद फिर यह मौक़ा कभी नहीं आया।

प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद राज्यसभा सांसद विवेककृष्ण तंखा ने कैबिनेट बैठक यहाँ कराने की पहल की। उनकी इस पहल को शहर से बने मंत्री लखन घनघोरिया और तरुण भनोत ने आगे बढ़ाया। जिसका नतीजा यह हुआ कि आगामी 16 फ़रवरी को जबलपुर में प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक होगी। यह बैठक शक्ति भवन में होगी। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ख़ुद जनभावनाओं को समझते हुए सांसद विवेक तंखा के आग्रह पर यह निर्णय लिया। स्वभाविक है कि इस बैठक में मंत्रियों सहित तमाम विभाग प्रमुख उपस्थित रहेंगे।

अब सवाल उठता है कि जबलपुर में कैबिनेट बैठक होने से क्या फ़ायदा होगा। इतना फ़ायदा ज़रूर होगा कि प्रदेश के मंत्री और बड़े अधिकारी जबलपुर को समझेंगे। यहाँ की ढाँचागत कमियों को देखेंगे। स्थानीय प्रशासनिक अमला चुस्त-दुरुस्त होकर शहर को व्यवस्थित करेगा और यहाँ की विकासरूपी आवश्यकताओं को उचित माध्यम से बड़े अधिकारियों तक पहुँचाएगा।

चूँकि मुख्यमंत्री कमलनाथ का जबलपुर से ख़ासा लगाव है। जब वो कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करने यहाँ आएँगे तो जबलपुर का हित और जिले के विकास के बारे में निश्चित ही सोचेंगे। अगर ऐसा हुआ हो जबलपुर उपेक्षा के दंश से बाहर निकल सकता है।