ये अफसर, इन्हें क्या नाम दें ?

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राकेश दुबे

आज की सुर्ख़ियों में भारतीय प्रशासनिक सेवा है | भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और उनके मातहत ही संविधान में वर्णित कार्यपालिका हैं | इस कार्यपालिका के स्याह, सफेद और उज्ज्वल चेहरे ही देश की छवि बनाते बिगाड़ते हैं | ये तीन अलग-अलग सुर्ख़ियां भारत के नागरिकों को यह समझाने के लिए काफी है की गलती कहाँ है और क्यों ? सबसे पहली अच्छी बात और उज्ज्वल सुर्खी |
२००२ बैच के आईएएस टॉपर अंकुर गर्ग ने ‘इंसान चाहे तो कुछ भी कर सकता है’ वाली कहावत को सच कर दिखाया है. अंकुर ने हाल ही में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में १७० में से १७१ अंक हासिल कर इस बात को सही साबित कर दिखाया है कि इंसान अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर कुछ भी हासिल कर सकता है| अंकुर गर्ग हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में ‘इंटरनेशनल डेवेलपमेंट’ की पढ़ाई कर रहे हैं, जिन्होंने हाल ही में मैक्रो इकोनॉमिक्स में १७० में से १७१ अंक हासिल करते हुए हर किसी को हैरान कर दिया है| वहीं अधिकारी अंकुर गर्ग ने अपने उपलब्धि का श्रेय अपने पिता को देते हुए कहा कि मेरे पिता बचपन में मुझसे जो कहते थे वह सच साबित हो गया|अंकुर गर्ग ने कहा कि ‘जब में स्कूल में था, मेरे पिता हमेशा मुझसे कहते थे कि १० में से १० लाना कोई बड़ी बात नहीं है. यह पर्याप्त नहीं है. हमेशा कोशिश करो कि तुम्हें 10 में से 11 अकं मिलें | कीर्तिमान बनाने अंकुर कि यह बात इसलिए भी खास है क्योंकि उनके इस कीर्तिमान पर जेफरी फ्रैंकेल ने साइन किया है | जेफरी फैंकेल एक मशहूर इकोनोमिस्ट हैं और हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी के केनेडी स्कूल में प्रोफेसर हैं|
प्रतिभा के दम पर ही भारतीय प्रशासनिक और अन्य सेवाओं में चयन होता है | कुछ उज्ज्वल नाम अंकुर की तरह होते है तो कुछ बी. चन्द्रकला की तरह तो कुछ पी दयानन्द की भांति |
आई ए एस बी चंद्रकला के घर जिस दिन खनन घोटाले के मामले में सीबीआई का छापा पड़ा, उससे महज नौ दिन पहले ही तेलंगाना में उन्होंने एक प्रॉपर्टी खरीदी थी| यह प्रॉपर्टी एक आवासीय प्लॉट के रूप में है| १०७ नंबर का यह प्लॉट तेलंगाना के मलकाजगिरी जिले के ईस्ट कल्याणपुरी में है| उन्होंने २७ दिसंबर २०१८ को ही इस प्लॉट की रजिस्ट्री कराई थी| खास बात यह है कि २२.५० लाख रुपये के इस प्लॉट को उन्होंने बिना किसी बैंक लोन के खरीदा| छापे से तीन दिन पहले ही चंद्रकला की ओर से एक जनवरी २०१९ को आईपीआर (Immovable Property Return) दाखिल किया गया था| वर्ष २०१८ की संपत्तियों के ब्योरे इस रिटर्न में उन्होंने भरे | अपनी कुल सैलरी ९१४०० रुपये महीना बताई| एक जनवरी २०१९ को भरे इस रिटर्न में बी चंद्रकला ने अपने पास सिर्फ इसी प्रॉपर्टी की जानकारी दी है| उसके पूर्व के वर्षों में भरे रिटर्न में उन्होंने जिन संपत्तियों की सूचना दी थी, उसके बार में नए रिटर्न में कोई सूचना नहीं है| सवाल उठता है कि क्या चंद्रकला ने पूर्व की सारी प्रॉपर्टियां बेच दीं, या फिर किन वजहों से उन्होंने नए रिटर्न में उसकी सूचना नहीं दी| वैसे हर साल के रिटर्न में उन सभी संपत्तियों की जानकारी देनी होती है, जो संबंधित अफसर और परिवार के पास होती हैं, भले ही इसकी सूचना आप पूर्व में दे चुके हों|
ऐसे भी कई अफसर देश में है जो अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल “जनकाज” और “राजकाज” की जगह कहीं और इस्तेमाल करते है | ऐसे ही अफसरों का राजनीतिज्ञों से कुत्सित गठजोड़ बन जाता है जो कभी ‘इसके’ तो कभी ‘उसके’ कहलाते हैं | सरकार बदलते ही पारितोषिक या दंड पाते हैं | मध्यप्रदेश में ऐसे ही “ईनाम” इन दिनों बंट रहे हैं |
तीसरी सुर्खी छत्तीसगढ़ से है | इसे सत्ता की सनक थ या फिर कुर्सी की खुमारी, एक मंत्रीजी ने आई ए एस अफसर को धमकाना शुरू कर दिया |जो चौकाने वाला है | राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल कोरबा ने अफसर पी दयानंद को निपटा देने की धमकी खुले आम दी | दरअसल, पी दयानंद पिछले शासन कोरबा के कलेक्टर थे, उस दौरान उन्होंने जयसिंह अग्रवाल के खिलाफ मिली शिकायतों पर कार्रवाई की थी| सच में आई ए एस अफसर बड़े होते हैं, पर असली खुदा तो इनके मातहत अफसर होते है, जिनकी प्रतिभा [?] दुधारी तलवार होती है | जो हमेशा काटती ही है |