सांसदों विधायकों के अच्छे प्रदर्शन न होने की जिम्मेदारी मुखिया की

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नई दिल्‍ली= केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। पिछले दिनों उन्होंने नेतृत्व को हार की जिम्मेदारी लेने की सलाह दी तो सोमवार को उन्होंने कह दिया कि सांसद, विधायकों का प्रदर्शन अच्छा नहीं तो जिम्मेदारी पार्टी के मुखिया की होती है। अब गडकरी ने अपने एक संबोधन में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जावहरलाल नेहरू के भाषण को याद किया है।
गडकरी इंटेलिजेंस ब्‍यूरो के 31वें व्याख्यानमाला में सहिष्‍णुता और देश में गुणात्‍मक सुधार लाने पर बोल रहे थे। उन्‍होंने कहा, ‘सिस्‍टम को सुधारने के लिए दूसरे की तरफ उंगली क्‍यों कर रहे हो, अपनी तरफ क्‍यों नहीं करते। मुझे याद है जवाहरलाल नेहरू अक्‍सर कहते थे कि इंडिया इज नॉट अ नेशन, इट इज अ पॉप्युलेशन (भारत एक देश नहीं जनसंख्‍या का समूह है) और दूसरी बात वह कहते थे कि इस देश का हर व्‍यक्ति देश के लिए एक समस्‍या है, एक प्रश्‍न है। मुझे उनका यह भाषण बहुत पसंद है। तो मैं इतना तो कर सकता हूं कि मैं देश के सामने एक समस्‍या नहीं रहूंगा। अगर सब लोगों ने इतना भी तय किया कि मैं समस्‍या नहीं रहूंगा तो भी तो आधे प्रश्‍न सुलझ जाएंगे। दूसरी बात यह है कि मेरे साथ किसी ने अन्‍याय किया होगा पर मैं किसी के साथ अन्‍याय नहीं करुंगा।’
इससे पहले गडकरी ने कहा था कि पार्टी के सांसद और विधायकों का प्रदर्शन अगर अच्छा नहीं रहता तो उसकी सीधी जिम्मेदारी पार्टी के मुखिया की होती है। इस बयान से दो दिन पहले उन्होंने कहा था कि सफलता के कई पिता होते हैं लेकिन असफलता अनाथ होती है। उन्होंने आगे कहा था कि नेतृत्व को हार की भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। गडकरी के उस बयान के लोगों ने अलग-अलग मायने निकाले थे। यह तक कहा गया था कि गडकरी बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से नाराज हैं।
विवाद बढ़ने पर गडकरी ने सफाई दी थी कि पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंध कभी नहीं बिगड़ेंगे और वह 2019 में पीएम के रूप में नरेंद्र मोदी का समर्थन करते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि उनका बयान बैंकिंग सेक्टर की ओर इशारा कर रहा था।