मीसाबंदियों की पेंशन पर ख़तरा

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ज़हीर अंसारी

मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही नई-नई योजनाएँ और क़ानून बनाने की प्रक्रिया तेज़ी से प्रारंभ हो गई है। नए मुख्यमंत्री कमलनाथ द्रुत गति से काम करने के मूड में दिख रहे हैं। वे अपने वचन पत्र में किए गए वायदों को पूरा करना चाहते हैं। वायदों को पूरा करने में धन का रोड़ा है। शायद इसलिए ही नई सरकार पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान सरकार की उन योजनाओं को समाप्त करने का मन बना लिया है जिससे आम लोगों का कोई फ़ायदा नहीं होता, सिर्फ़ भाजपा के लोग लाभान्वित हो रहे हैं। ऐसी ही एक योजना है मीसाबंदियों को दी जाने वाली सम्मान निधि योजना। इस योजना के तहत उन लोगों को 25 हज़ार रुपए मासिक दिए जाते हैं जो इमरजेंसी के दौरान जेल में निरुद्ध कर दिए गए। यह योजना मीसाबंदियों के आग्रह पर शिवराज सिंह ने शुरू की थी जो अब तक जारी है। इस योजना के तहत क़रीब-क़रीब 110 करोड़ का भार सरकार हर साल उठाती रही है। नई सरकार इस योजना को बंद करने प्रस्ताव ला रही है। सरकार का मानना है विशेष लोगों पर की जा रही फ़िज़ूलखर्ची रोककर समग्रता वाली योजनाओं में ख़र्च की जाए।

कांग्रेस सरकार ने अगर लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि बंद कर दी तो हज़ारों मीसाबंदी सरकारी इमदाद से महरूम हो जाएँगे। सिर्फ़ जबलपुर में ही क़रीब दो सौ दस मीसाबंदियों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। जिले के क़रीब 110 मीसाबंदियों को 25 हज़ार और सौ बंदियों की विधवाओं को साढ़े 12 हज़ार रुपए मासिक पेंशन मिल रही है।

जहाँ कांग्रेस सरकार के इस प्रस्ताव के समर्थन में है तो वहीं भाजपा वाले ख़िलाफ़ में। अब देखना होगा कि कमलनाथ सरकार कब तक इस पर आख़िरी फ़ैसला करती है। हालाँकि उससे पहले मीसाबंदी सम्मान निधि क़ानून ख़त्म करना पड़ेगा।