कांग्रेस की कमान छात्र नेताओं के हाथ….

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ज़हीर अंसारी
मुल्क के किसी भी शहर के इतिहास में शायद ऐसा कभी हुआ हो किसी पार्टी ने एक जिले की आठ विधानसभा सीटों में से छः सीटों पर स्टूडेंट लीडर को उतारा हो। यह कारनामा इस बार कांग्रेस ने कर दिखाया है। जबलपुर की आठ विधानसभा सीटों में से दो को छोड़ दिया जाए तो छः सीटों पर कांग्रेस की टिकिट से अपने दौर के छात्र नेता चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस के ये प्रत्याशी अपने ज़माने के दबंग छात्र नेता के रूप में विख्यात रहे हैं।

कांग्रेस ने केंट से आलोक मिश्रा, पूर्व से लखन घनघोरिया, पनागर से सम्मति प्रकाश सैनी, बरगी से संजय यादव, पश्चिम से तरुण भनोत, उत्तर मध्य से तीन बार के पार्षद विनय सक्सेना को चुनावी समर में उतारा है। लखन घनघोरिया एक बार विधायक रह चुके हैं। जबकि तरुण भनोत विधायक हैं। ये दोनों एक-एक बार और आलोक मिश्रा एक बार चुनाव हार चुके हैं जबकि संजय यादव दो बार पराजय झेल चुके हैं। बावजूद इसके ये सभी इस मर्तबा कांग्रेस की टिकिट पाने में कामयाब हो गए हैं। इन सभी ने कालेज़ और यूनिवर्सिटी की सियासत सालों की है। इनमें से तरुण ने कालेज़ की पढ़ाई भिलाई से की है सो उनने वहाँ पर स्टूडेंट पोलिटिक्स की थी।

वहीं पाटन विधानसभा के वर्तमान विधायक नीलेश अवस्थी पुनः कांग्रेस के पंजे के साथ मोर्चा संभाल लिया है। पिछली बार नीलेश ने भाजपा के क़द्दावर नेता पूर्व मंत्री अजय विश्नोई को पराजित किया था। नीलेश को छात्रनेता की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता मगर अनुज रत्नेश अवस्थी लम्बे वक़्त तक एनएसयूआई का अध्यक्ष रहकर छात्रों की राजनीति की है जिसका अनुभव पिछले चुनाव में काम आया था।

सिहोरा विधानसभा से अलबत्ता खिलाड़ी सिंह आर्मो जो भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुये, को कांग्रेस ने टिकिट प्रदान की है। खिलाड़ी भाजपा के चुनावी रणनीति के हिस्सेदार रहे हैं।

इस तरह कांग्रेस ने पहली मर्तबा स्टूडेंट लीडर पर दाँव खेला है। आठ प्रत्याशियों में से सात उम्मीदवार प्रदेश अध्यक्ष सांसद कमलनाथ पक्के समर्थक हैं। अब देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि ये किस तरह चुनाव लड़ते हैं और भाजपा के स्थापित नेताओं और गढ़ में कैसे सेंध लगा पाते हैं।