गौर और विजयवर्गीय के सामने बीजेपी ने घुटने टेके

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भोपाल =बीजेपी नेतृत्व ने प्रदेशके वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यम्नत्री बाबूलाल गौर और कैलाश विजयवर्गीय के आगे घुटने टेक दिए हैं। गौर की बहू और विजयवर्गीय के बेटे को विधानसभा का टिकट दिया गया है। कैलाश विजयवर्गीय ने अपने बेटे के लिए सीट छोड़ दी है।
अभी भी बीजेपी राज्‍य की 6 सीटों पर प्रत्याशी तय नही कर पाई है। इनमें वरिष्ठ नेता सरताज सिंह की सिवनी मालवा और कुसुम महदेले की पन्ना सीट भी शामिल है। इनके अलावा भोपाल उत्तर, महिदपुर लखनादौन और गरोठ सीटों का मामला अटका हुआ है। तीसरी सूची के मुताबिक इस बार 9 विधायकों के टिकट काटे गए हैं।
बीजेपी ने कांग्रेस छोड़कर आए प्रेमचंद गुड्डू के बेटे अजीत बोरासी को उज्जैन की घट्टिया सीट से उतारा है। उधर, तेंदूखेड़ा में कांग्रेस के मुलायम सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। मुलायम पिछले सप्ताह ही बीजेपी में शामिल हुए थे। इसके अलाबा भिंड से राकेश चौधरी को उतारा है जबकि उनके छोटे भाई मुकेश चौधरी का मेहगांव का टिकट काट दिया है।
मुकेश मेहगांव से 2013 का चुनाव जीते थे। कांग्रेस नेता रहे रुद्र प्रताप सिंह की पत्नी राजश्री सिंह को भी टिकट मिला है। उन्हें मंत्री सूर्यप्रकाश मीना की जगह टिकट दिया गया है। बीजेपी ने चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के आगे घुटने टेक दिए। गौर की गोविंदपुरा सीट से अब उनकी बहू कृष्णा गौर चुनाव लड़ेंगी लेकिन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन अपने बेटे को टिकट नही दिलवा पायीं।
कैलाश विजयवर्गीय ने अपने बेटे के लिये खुद की विधानसभा दावेदारी छोड़ दी है। 28 साल बाद विजयर्गीय चुनाव नहीं लड़ेंगे। वह अमित शाह की टीम में महासचिव हैं। इस बीच सरताज सिंह ने चेतावनी दी है कि वह मैदान नहीं छोड़ेंगे। उन्‍होंने कहा, ‘लड़ूंगा तो मैदान-ए- जंग में और मरूंगा तो मैदान-ए-जंग में।’
कुछ ऐसे ही तेवर कुसुम महदेले के भी हैं। मीडिया के सामने सरताज अपने आंसू नहीं रोक पाए। माना जा रहा है कि सरताज सिंह और रामकृष्ण कुसमरिया बागी हो सकते हैं। फिलहाल बीजेपी में बगावत तेज हो गयी है। कई जगह से नाराज नेता निर्दलीय के तौर पर चुनावी मैदान में उतर रहे हैं।