बिग बी ने इशारों में बहुत कुछ कह दिया…

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ज़हीर अंसारी
सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने रविवार को ट्वीट किया कि ‘उन लोगों से बहस करना बेकार है जो अपने ही झूठ में विश्वास करते हैं।’

श्री बच्चन ने यह ट्वीट किस तारतम्य में किया यह वो ही जाने। उनका मंतव्य क्या है, किस ओर उनका इशारा है यह भी उनका मन-मस्तिष्क ही जानता होगा लेकिन उनके ट्वीट की सच्चाई और अर्थ की गहराई का अंदाज़ा कोई भी लगा सकता है। हर आम और ख़ास यह जानता है कि मुल्क की अवाम के सामने नित्य नए झूठ परोसे जा रहे हैं। झूठ पर झूठ फैलाना एक शग़ल सा बन गया है। अतीत पर झूठ, वर्तमान पर झूठ और भविष्य पर झूठ। इस तरह के झूठ पर विश्वास जताना, बहस के तमाम दरवाज़े ख़ुद-ब-ख़ुद बंद कर देता है। शायद इसलिए ही देश का प्रबुद्ध वर्ग, इतिहासकार, साहित्यकार, कलाकार जो देश समाज को दिशा देने के कारक होते हैं, ने झूठ पर बहस करने या अभिव्यक्ति प्रकट करने से परहेज़ करने लगे हैं। ये वर्ग ख़ामोशी को वरण कर झूठ का तमाशा देख रहा है। किसी में इतना साहस नहीं कि वह खुलकर लगातार बोले जा रहे झूठ को झूठ कह सके। अलबत्ता भीड़ तंत्र का एक तबक़ा इन झूठों पर तालियाँ बजा रहा है। मीडिया का एक बड़ा वर्ग झूठ को सच्च और विश्वास लायक साबित करने में सुनियोजित ढंग से काम कर रहा है। मीडिया का ये तबक़ा यह भी भूल गया कि उसे देश का चौथा स्तम्भ कहा जाता है। झूठ को आइना दिखाने की बजाय ये झूठ पर सफ़ेदी पोतकर चमकदार बनाने में जुटा है।

श्री बच्चन का यह ट्वीट कई मायनों में बहुत कुछ कह गया। बच्चन साहब कोई छोटी हस्ती तो हैं नहीं, न ही सीमित और संकुचित मानसिकता से ग्रसित हैं। उनका व्यक्तित्व विशाल है। उनकी रगों में साहित्य, कविता, कला के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं की रंगत भी है। उन्हें सामाजिक, व्यापारिक और राजनीतिक क्षेत्र का अध्ययन भी ख़ूब है। उन्होंने यूँ ही नहीं कह दिया कि ‘उन लोगों से बहस करना बेकार है जो अपने ही झूठ में विश्वास करते हैं।’ शायद बच्चन साहब मुल्क को कोई संदेश देना चाह रहे हों।खुलकर बोलने की बजाय उन्होंने इशारों-इशारों में ही अपनी बात कह दी। मानों वो कहना चाह रहे हों कि….

न पड़ किसी बहस व मुबायसे में
वरना बेवजह तू भी मारा जाएगा

या फिर
ज़रा ठहरकर बैठ जा ऐ रास्ते के मुसाफ़िर
अभी यहाँ झूठ की बरसात का सिलसिला है।