क्या औरत रबड़ की गुड़िया है…..?

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ज़हीर अंसारी
सुनकर बड़ा अजीब लगता है कि एक बीवी ने अपने शौहर का क़त्ल सिर्फ़ इसलिए कर दिया कि वह सेक्स विकृति से पीड़ित था। बीवी को ज़बरिया सेक्स के लिए मजबूर करता था। यह हादसा अपने आपमें अनोखा है। जबलपुर में इस तरह की वारदात अब तक तो नहीं हुई थी। अब तक बीवी द्वारा पति की हत्या के जो मामले सामने आए हैं वो शराबखोर पति की प्रताड़ना या प्रेम प्रसंग के कारण हुए, या फिर घरेलू हिंसा से त्रस्त पत्नी ने पति की हत्या कर डाली है।

अयाजुर्रहमान उर्फ़ कालू पहलवान की हत्या की आरोपी उसकी बीवी हिना निकली। तीन बच्चों की माँ हिना ने अपने जुर्म क़बूलनामे में पुलिस को बताया कि वह पति की सेक्स विकृति से हलाकान थी। कमोत्तोजक दवाइयाँ खाकर और पत्नी को खिलाने का वो आदी था। 35 साला मृतक अपने इस शौक़ को पूरा करने के लिए अपनी बीवी से गाली-गलौज और मारपीट किया करता था। मृतक के मोबाईल से पोर्न फ़िल्में का मिलना उसकी विकृति को साबित करता है।

हिना द्वारा अपने पति कालू पहलवान की हत्या करना, सामान्य घटना हो सकती है मगर इसकी गहराई को समझने की आवश्यकता है। दीनी दायरे में रहने वाली तीन बच्चों की माँ, नन्हें मासूमों के होते हुए कैसे शौहर के क़त्ल का फ़ैसला ले सकती है और क़त्ल को अंजाम भी दे सकती है।

हिना का यह फ़ैसला इस बात को उजागर करने के पर्याप्त है कि औरत जिस्म की भूखी नहीं होती है। पति अपनी मर्दानगी दिखाने ताक़त और कमोत्तोजक दवाइयों की दम पर भले पत्नी को नोच डाले मगर उसका समर्पण हासिल नहीं कर सकता। ज़बरिया बीवी की मजबूरी हो सकती है मगर औरत की नहीं। हिना भी एक औरत थी। बीबी के नाते वो सब कुछ बर्दाश्त करती रही होगी लेकिन जब उसके अंदर की औरत जागी तो उसने वह कर दिया जिसकी कल्पना ख़ुद उसने सपने में भी न की होगी। अपने ममत्व को दरकिनार रखकर तीन छोटे-छोटे बच्चों के पालन-पोषण करने वाले पति को उसी की चाक़ू से गोद-गोदकर मौत के घाट उतार दिया।

औरत का यह का रूप बड़ा विकराल माना है। औरत जब इस रूप में आती है तो शायद वह अंदर से पूरी तरह टूट चुकी होती है। औरतें कई तल पर जीती हैं। बीवी बनकर वो हृदय, मस्तिष्क और भावनाओं का पूरा समर्पण पति-बच्चों और परिजन को कर देती है। बदले में अगर उसे पति से प्रेम, विश्वास और सम्मान न मिले तो शारीरिक समर्पण में हिचकिचा जाती है। ऐसी बीवियाँ अपनी जिस्मानी ज़रूरतों को भी नज़रंदाज कर देती हैं।

अब बात करते हैं कालू जैसे उन मर्दों की जो औरत को रबड़ की गुड़िया समझते हैं। स्मार्टफ़ोन और इंटरनेट पर उपलब्ध पोर्न फ़िल्म की भरमार ने युवा पीढ़ी के दिमाग़ का भुर्ता बना दिया है। इन नासमझो को ये भी समझ नहीं है कि पोर्न फ़िल्म बनती नहीं है, बनाई जाती है। बनाई गई पोर्न फ़िल्म से ख़ुद को प्रतिस्पर्धी मान लेते हैं और फिर साग-भाजी की तरह कमोत्तोजक औषधियाँ खाकर बीवी पर ज़ोर आज़माइश करते हैं। पोर्न फ़िल्म और उत्तेजना बढ़ाने वाली दवाइयों का सेवन इनके ख़ुद के शरीर पर क्या दुष्प्रभाव डालेगी उन्हें इसकी भी चिंता नहीं होती।

दुनिया की ऐसी कोई पोर्न फ़िल्म या दवा नहीं है जिससे औरत का समर्पण पाया जा सके। धन-दौलत से औरत के शरीर को पाया जा सकता है मगर उसके समर्पण को नहीं। समर्पण पाने के लिए लाज़िमी तत्व प्रेम, सम्मान और विश्वास है। पति-पत्नी के बीच में इन तत्वों का होना आवश्यक है।