गुजरात : हम भारतीय क्यों नहीं ?

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राकेश दुबे

यह कितनी बुरी बात है कि आज़ादी के इतने बरस बाद भी भारत में लोग भाषा और प्रदेश के नाम से जाने जा रहे हैं | भारतीय होने से पहले लोगों को उनकी भाषा और रहन सहन से पहचान देकर यहाँ से वहां खदेड़ा जाता है | केंद्र सरकार मौन है और उसके सामने ताल ठोंक, प्रतिपक्ष इसी भावना को हवा दे रहा है | उसका उद्देश्य सरकार बदलना है, पर जो रक्त बीज वो बो रहा है उसकी फसल कैसी होगी सब जानते हैं ? भाषावाद और क्षेत्रवाद की जिस आग को हवा दी जा रही है, उसमे एक सहज सवाल उठता है कि ऐसे में मध्यप्रदेश कहाँ रहेगा ? जिसमें हर भाषा भाषी और हर क्षेत्र के लोग है| भाषाओँ के इस गुलदस्ते के साथ यह समस्या है कि वो अपनी पहचान किस भाषा या प्रान्त से जोड़े |
बहुत लंबे समय से उत्तर प्रदेश और बिहार के मूल निवासियों पर देश के अलग-अलग भागों में हमले हो रहे हैं.|असम के तिनसुकिया इलाके में २०१५ में संदिग्ध उल्फा आतंकवादियों के हाथों एक हिंदी-भाषी व्यापारी और उसकी बेटी की हत्या कर दी गयी थी| यह शुरुआत थी | दरअसल, जब भी किसी को अपनी ताकत दिखानी होती है, वह निर्दोष हिंदी भाषियों को ही निशाना बनाने लगता है| यह देश के संघीय ढांचे को ललकराने के समान है| यह स्थिति हर हालत में रुकनी ही चाहिए. इसे न रोका गया, तो देश बिखराव की तरफ बढ़ेगा|
गुजरात में अभी जो हिंसा हो रही है, उसमें हिंदी भाषी लोगों के साथ असमिया, मणिपुरी, उड़िया और बंगाली भी पिट रहे है| महाराष्ट्र में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता और उसके कार्यकर्ता उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के साथ कभी भी मार-पीट करने से बाज नहीं आते|वे इन प्रदेशों के नागरिकों को ‘बाहरी’ कहते हैं| यह प्रमाणित तथ्य है कि सिर्फ समावेशी समाज ही आगे बढ़ते हैं| अमेरिका इसका उदाहरण है| इस मामले में पूरा विश्व अमेरिका को अपना आदर्श मानता है| उसकी यह स्थिति इसलिए बनी, क्योंकि वहां पर सबके लिए आगे बढ़ने के समान अवसर हैं|वहां पर दुनिया के कोने-कोने से लोग आकर बसते हैं और अमेरिकी हो जाते हैं| हम भारत में पैदा होकर भी भारतीय होने से पहले कुछ और होते हैं | ऐसा क्यों हैं ?
जो लोग इस मामले को किसी क्षेत्र विशेष के लोगों से जोड़कर देख रहे हैं, वे अपनी संकीर्ण मानसिकता का ही परिचय दे रहे हैं| ये देश ‘हम’ और ‘तुम’ के हिसाब से नहीं चलेगा| अगर इस तरह से कोई चलाने की मंशा रखता है, तो उसे हम सबको नकारना चाहिए | किसी के साथ भारत में कहीं भी उसकी जाति, धर्म, रंग आदि के आधार पर भेदभाव किया जाना असहनीय है| हिंदी भाषियों के साथ जो हो रहा है, इस मानसिकता पर तुरंत रोक लगाना जरूरी है| देश को कानून के रास्ते से नहीं चलाया गया, तो अराजकता की स्थिति पैदा हो जायेगी|
यह देश सबका है, यहां के संसाधन हर भारतीय के हैं| साथ ही मध्यप्रदेश जैसा राज्य जो विभिन्न भाषाओँ का गुलदस्ता है को अपने यहाँ रोजगार के वृद्धि करना चाहिए जिससे उसके युवा किसी अन्य राज्य में नौकरी के लिये न भटके | घुन की तरह मध्यप्रदेश के युवा हर बार पिसते हैं | हाल की हिंसा से गुजरात का हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है| जीआइडीसी के अध्यक्ष राजेंद्र शाह के अनुसार, गुजरात में ७० प्रतिशत से ज्यादा श्रमिक हिंदी भाषी भारतीय हैं, जिनमें मध्यप्रदेश से भी हैं| वहां दंगा किसने भड़काया यह भी जान लेना जरूरी है| इस शख्स का नाम है अल्पेश ठाकोर, जो अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का राष्ट्रीय सचिव और राहुल गांधी का चहेता है| अल्पेश खुद को गुजरात का राज ठाकरे बनाना चाहता है|