इस देश में हर शख्स परेशा सा क्यों है

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सी एन दुबे

दोस्तो,इस समय पूरा देश परेशान लग रहा है।एक अजीब सी बैचेनी है,एक अंदर ही अंदर जबरदस्त उथलपुथल मची हुई है।मैं भी बहुत परेशान हूँ,बैचेन हूँ कुछ भुगतकर और कुछ देखकर क्योकि मैं भी आखिर देश का एक हिस्सा हूँ।
मैं नोटबन्दी में बहुत परेशान रहा क्योंकि लाइन में लगकर घंटों इंतजार कर अपनी आई डी दिखाकर पैसे जमा कर पाया।काम के लिए पैसे निकालने फिर लाइन ,घंटो इंतजार किस काम के लिए है उसका सबूत और बिल बताओ फिर कहीं अपना पैसा निकालने की परेशानी झेली। मै ये पढ़कर ,सुनकर भी परेशान रहा कि लोग लाइन में खड़े रह रहकर हार्ट अटैक से अपने जीवन से मुक्त हो गए। जो घर जाकर मरे उनका तो कहीं हिसाब ही नही है।
फिर जी,एस, टी, से व्यापारियों के साथ मैं भी बहुत परेशान हो गया,क्योकि व्यापरियों को तो केवल टैक्स के रिटर्न्स भरने में ,एक निश्चित सिस्टम न होने के कारण परेशानी हुई लेकिन टैक्सके का भार तो आखिर हमारे ऊपर ही पड़ा और सब वस्तुयें मँहगी हो गयी।
मैं किसान भी हूँ औऱ ऊपर वाले के कारण फसल बर्बाद हुई और अब कर्ज पटाने में परेशान हूँ।फिर किसानों पर गोलीचालन और उनके सम्मान को चोट पहुचाने और एक कैदी से बद्तर व्योहार होने के कारण परेशान हूँ। कर्ज के कारण उनकी आत्महत्या के समाचार पढ़कर तो में अत्यंत बैचेन हो जाता हूँ कि आखिर अब उनकी पत्नी बच्चों का क्या होगा।
हर कदम पर भ्रष्टाचार के कारण तो जीवन बेहाल बना हुआ है।नगरनिगम नक्शा ,टैक्स के लिए जाओ तो,पटवारी आर आई तहसीलदार के पास नामांतरण, दस्तावेज ,सीमांकन बटांकन किसी के लिए जाओ तो,पुलिस के पास किसी शिकायत को लेकर जाओ तो,आर टी ओ के पास वाहन के रेजिस्ट्रेशन के लिए जाओ तो इनकम टैक्स, पी डव्लू ,सिचाई किसी भी विभाग के पास जावो पहले घंटो इंतजार फिर चक्कर पे चक्कर और फिर बिना पैसे लिए कोई काम ही नही होता इससे मैं बहुत परेशान हो गया हूँ ।
व्यापम जैसे कांड देखकर तो मैं पागल हो गया हूँ इसकी तो किसी से भी तुलना सम्भव नही है।कितने नवजवानों ने इसका शिकार होकर आत्महत्या कर ली और सैकड़ों लोग प्रताड़ित हुऐ।भूमाफिया,रेत,गिट्टि माफिया के कारण अपनी ज़मीन बचा पाना और घर सुधरवाने मे भी मुश्किल हो गयी है।
गांव में दो कमरे के स्कूल देखकर और उसमें टाटपट्टी में बैठे ठसाठस भरे बच्चों को देखकर में बहुत परेशान हो जाता हूँ।अस्पताल व्हीन गांवों और जहां अस्पताल वहा दवाई और डॉक्टर के अभाव में मरते लोगों को देखकर मै अत्यंत बेचैन हो जाता हूँ।
ये,और ऐसे अनेक सरकार जन्य चीज़ों को देखकर मैं बहुत परेशान ,बेचैन होता रहता हूँ,और एक आग सी सीने में धधकती रहती है।
इन सब समस्याओं का हल किसी एक पास नही हो सकता ।चुनी हुई सरकार से ही इन सबका हाल संभव है।मेरी परेशानी का हल भी उसी सरकार से है।लेकिन मैं इन सबको सहन कर सकता हूँ हर परेशानी झेल सकता हूँ ,अर्थ और सुविधायें जीवन मे बहुत मायने रखती हैं किन्तु राष्ट्र से देश से बड़ा कुछ नही हो सकता ।अर्थ,सुविधाएं मुझे लगता है समय के साथ परिवर्तित होगी।हम मेहनती है कुछ कर गुजरने का जज्बा है, आगे बढ़ने का जुनून है तो हम इन सब समस्याओं को पर कर लेंगे। लेकिन इस भारत राष्ट्र का अस्तित्व और अस्मिता बरकरार रहना जरूरी है।
मैं बी,जे पी का नही हूँ ,कांग्रेसी भी नही हूँ ना आम आदमी पार्टी का हूँ।मेरा मन कहता है यार सी,अन, तुम उसी पार्टी को सच्चा देश हितेषी मानना जो इन वायदों की घोषड़ा कर करने को प्रतिबध्द हो
सम्पूर्ण भारत के लिए जो किसी भी धर्म,सम्प्रदाय,जाति के हो ,बिना भेदभाव के एक जैसा कानून हो,एक कॉमन सिविल कोड हो और जो कश्मीर पर भी लागू हो।
२ संपुर्ण भारत के लोगो के लिए चाहे वो किसी भी धर्म ,सम्प्रदाय, जाति के हों परिवार नियोजन अनिवार्य हो। परिवार नियोजन अनिवार्य करने चीन जैसा एक कानून बनाये।दो बच्चों से अधिक पैदा करना दस्तंदाजी और अजमानतीय अपराध हो ।
३जैसे कश्मीर के लोगो को भारत में कहीं भी बसने का संपत्ति खरीदने का अधिकार है वैसे ही शेष भारत के लोगो को भी काश्मीर में बसने का और सम्पत्ति खरीदने का अधिकार हो ।
4राष्ट्र की सेना का बजट इतना पर्याप्त बढ़ाने की घोषड़ा करे कि चीन जैसे देश कभी भी अपने देश की ओर आंख उठाकर देखने का भी दुस्साहस न करे ।
और सभी परेशानियों को तो झेल लेंगे, जीवन में आर्थिक, शारीरिक,मानसिक परेशानिया तो लगी ही रहती है।
राहुल जी बोलिये क्या आप ये घोषड़ा करेंगे ।मोदी जी आप और केजरी वाल क्या आप और ओबेसी क्या आप
। । मेरे जैसे करोड़ो लोगो की परेशानी का हल तो इसी में है,शेष सरकार तो किसी की भी आये समय के साथ ये समस्याएं तो हम भारतवासी हल कर ही लेंगे ।