फाइनली एक मादा मच्छर का एक्सक्लूजिव इंटरव्यु ले ही लिया…..

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स्नेहा चौहान बाबा

सवाल -आपका प्रकोप दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है ? क्यों ?

मच्छर : सही शब्द इस्तेमाल कीजिये, इसे प्रकोप नहीं फलना-फूलना कहते हैं. पर तुम इंसान लोग तो दूसरों को फलते-फूलते देख ही नहीं सकते न ? आदत से मजबूर जो ठहरे.

सवाल-हमें आपके फलने-फूलने से कोई ऐतराज़ नहीं है पर आपके काटने से लोग जान गँवा रहे हैं, जनता में भय व्याप्त हो गया है ?

मच्छर : हम सिर्फ अपना काम कर रहे हैं. श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि ‘कर्म ही पूजा है’. अब विधाता ने तो हमें काटने के लिए ही बनाया है, हल में जोतने के लिए नहीं ! जहाँ तक लोगों के जान गँवाने का प्रश्न है तो आपको मालूम होना चाहिए कि “हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश-अपयश विधि हाथ’ …!

सवाल-लोगों की जान पर बनी हुई है,बेचारे हिल ढुल नही सकते, लंगड़ा रहे है और आप हमें दार्शनिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं ?

मच्छर : आप तस्वीर का सिर्फ एक पहलू देख रहे हैं. हमारी वजह से कई लोगों को लाभ भी होता है, ये शायद आपको पता नहीं ! जाइये इन दिनों किसी डॉक्टर, केमिस्ट या पैथोलॉजी लैब वाले के पास, उसे आपसे बात करने की फ़ुर्सत नहीं होगी. अरे भैया, उनके बीवी-बच्चे हमारा ‘सीजन’ आने की राह देखते हैं, ताकि उनकी साल भर से पेंडिंग पड़ी माँगे पूरी हो सकें. क्या समझे आप ? हम देश की इकॉनोमी बढाने में महत्त्वपूर्ण योगदान कर रहे हैं, ये मत भूलिएगा !

सवाल -परन्तु मर तो गरीब रहा है न, जो इलाज करवाने में सक्षम ही नहीं है ?

मच्छर : हाँ तो गरीब जी कर भी क्या करेगा ? जिस गरीब को आप अपना घर तो छोडो, कॉलोनी तक में घुसने नहीं देना चाहते, उसके साथ किसी तरह का संपर्क नहीं रखना चाहते, उसके मरने पर तकलीफ होने का ढोंग करना बंद कीजिये आप लोग.

रिपोर्टर -आपने जबलपुर,में कुछ ज्यादा ही कहर बरपा रखा है ?

मच्छर : देखिये हम पॉलिटिशियन नहीं हैं जो भेदभाव करें … हम सभी जगह अपना काम पूरी मेहनत और लगन से करते हैं. दिल्ली हो या जबलपुर,वैसे दिल्ली में हमारी अच्छी परफॉरमेंस की वजह सिर्फ इतनी है कि यहाँ हमारे काम करने के लिए अनुकूल माहौल है. केंद्र और राज्य सरकार ,के साथ निगम की आपसी उठा पटक का भी हमें भरपूर फायदा मिला है. कुछ भी कहो इस बार जम के दबाया है भाई।

सवाल-खैर, अब आखिर में आप ये बताइये कि आपके इस प्रकोप से बचने का उपाय क्या है ?

मच्छर : उपाय तो है अगर कोई कर सके तो … लगातार सात शनिवार तक काले-सफ़ेद धब्बों वाले कुत्ते की पूँछ का बाल लेकर बबूल के पेड़ की जड़ में बकरी के दूध के साथ चढाने से हम प्रसन्न हो जायेंगे और उस व्यक्ति को नहीं काटेंगे !

सवाल-आप उपाय बता रहे हैं या अंधविश्वास फैला रहे हैं ?

मच्छर : दरअसल आम हिन्दुस्तानी लोग ऐसे ही उपायों के साथ comfortable फील करते हैं ! उन्हें विज्ञानं से ज्यादा किरपा में यकीन होता है…. वैसे सही उपाय तो साफ़-सफाई रखना है, जो रोज ही टीवी चैनलों और अखबारों के जरिये,करोड़ो बर्बाद कर , अभियान चला कर,आप लोगो को बताया जाता है, पर उसे मानता कौन है ? अगर उसे मान लिया होता तो आज आपको मेरा interview लेने नहीं आना पड़ता।
बाकी जबलपुर नगर निगम के हम सब आभारी है,उनकी लापरवाही के कारण इस बार हम लोग की पार्टी हो गयी।
स्नेहा चौहान की फेसबुक से साभार