नर्मदा के तट पर ऐसा समां पहले कभी नहीं देखा ……..

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जबलपुर = अफसर तो सब होते है पर उनके सोच और काम काने का तरीका अलग अलग होता है, अधिकतर अधिकारी यथास्थिति की तर्ज पर काम करना चाहते है तो कुछ कुछ नया सोचते और करते भी है, और उनकी यही खूबी उन्हें दूसरे अफसर से अलग करती है जबलपुर में एसएएफ की छटवीं बटालियन के आईजी राजाबाबू सिंह ऐसे ही अफसरों में आते है जो हर वक्त कुछ नया करने के बारे में सोचते है…. संभवतः जबलपुर पुलिस के इतिहास में ये पहला मौका होगा जब बटालियन के ग्यारह सौ जवानो ने एक साथ माँ नर्मदा में जाकर कार सेवा कर लोगो को एक सन्देश दिया की यदि वे माँ नर्मदा को साफ रखेंगे तो न केवल माँ नर्मदा बल्कि वे खुद भी प्रदूषण से बच सकेंगे….. दरअसल ये परिकलपना भी आईजी राजा बाबू सिंह के दिमाग की ही थी उन्होंने कई दिनों पहले ये विचार बना लिया था को वे और उनके जवान माँ नर्मदा को साफ़ करने के लिए कार सेवा करेंगे और इसी सोच के तहत 7 अक्टूबर को सुबह छह बजे एएसएएफ के कार्यालय जो नर्मदा की दूसरे छोर रांझी में स्थित है से ग्यारह सौ जवानो का एक महा रैला दौड़ते हुए ग्वारीघाट के तरफ रवाना हुआ करीब डेड घंटे में जवान दौड़ते हुए माँ नर्मदा के तट पर पंहुचे जंहा बाकायदा कंपनी की बेंड पार्टी उनका इन्तजार कर रही थी जवानो के आते ही बेंड पार्टी ने देशभक्ति की धुन बजाना शुरू कर दिया और ये तमाम जवान हाथों में झाड़ू टोकनिया लेकर माँ नर्मदा के आँचल में समां गए, लगभग एक घंटे के श्रमदान के चलते जवानो ने न केवल नर्मदा के आँचल से चोई और काई निकाली बल्कि आसपास की नालियों को भी साफ़ किया जिसकी गंदगी माँ नर्मदा के पानी में मिल रही थी…….
जबलपुर में नर्मदा दर्शन के लिए आने वालो के लिए ये एक अजूबा ही था क्योकि उन्होंने कभी ऐसा नहीं देखा था देखादेखी अनेक नर्मदाप्रेमियों नेभी इन जवानो का साथ देना शुरूकर दिया….. इस सम्बन्ध मे आईजी राजाबाबू सिंह ने समाचार विचार डॉट कॉम से चर्चा करते हुए बताया की मैं और हमारे जवान नर्मदा के दर्शनों को आने वाले लोगो को ये सन्देश देना चाहते है की यदि नर्मदा शुद्ध रहेगी साफ रहेगी तो उसके भीतर पल रहे जीव जंतु भी सुरक्षित रहेंगे चूंकि नर्मदा जबलपुर की पहचान है इसलिए जब ये पहचान साफ़ सुथरी रहेगी तो समूचे जबलपुर कोइस सफाई का लाभ मिलेगा आपने बताया क़ि आधे से ज्यादा शहरमें पीने के पानी की आपूर्ति नर्मदा से ही होती है यदि ये पानी साफ़ होगा तो लोग और शहर वासी संक्रामक रोगो से भी दूर रह पाएंगे आपने बताया की हम लोगो को ये भी बताना चाहतेहै क़ि ग्यारह सौ जवानो के नाश्ते के बाद भी यदि वंहा एक भी जूठी प्लेट नहीं दिखाई दी तो तो वंहा भंडारा करवाने वाले लोग ऐसा क्योनही कर सकते
एसएएफ जवानो के इसश्रमदान को नर्मदा दर्शन करने आने वाले लोगो ने न केवल सराहा बल्कि उनके भीतर एक कौतूहल भी जगाया निश्चिततौर पर इस पुनीत काम का श्रेय किसी को जाता है तो वो है आईजी राजा बाबू सिंग