भटैती की नई परिभाषा…….

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ज़हीर अंसारी

चाटुकारिता जिसे सामान्य भाषा में भटैती भी कहा जाता है, की नई परिभाषा गढ़ी जा रही है। एक प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अपने देश के पीएम को विश्व का सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेता क़रार दिया है। विश्व के सर्वाधिक क़रार दिए जाने वाले राजनेता का आगमन कहने वाले सीएम के राज्य में होने जा रहा है। कहने वाले सीएम की नैया आने वाले पीएम ही पार लगा सकते हैं, क्योंकि सीएम का अब तक किया-धरा, धरा नज़र आ रहा है। इसलिए अब उन्हें पीएम विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेता दृष्टिगत हो रहे हैं। यह वही सीएम है जो सन 2013-14 में आज के पीएम की पीएम उम्मीदवारी की खुलकर मुख़ालफ़त करते थे, चीख़-चीख़कर आख़िरी वक़्त तक मुख़ालफ़त की थी। सौभाग्य कहें या दुर्भाग्य तब का पीएम उम्मीदवार आज हक़ीक़ी पीएम है। प्रस्तावित पीएम जब से वास्तविक पीएम बने हैं तब से विरोध करने वाले सीएम की घिग्घी बंधी चली आ रही है। पीएम को ख़ुश रखने के लिए सीएम साहब तरह-तरह के नवाचार करते आ रहे हैं। पीएम की फ़ोटो-फ़ॉटा लगाकर लगातार इश्तिहार देते आ रहे हैं। पीएम के मुँह खोलने से पहले उनके भाव समझकर योजना और नीति अपने राज्य में लागू कर देते हैं। सीएम पहले जनसभाओं में अपनी पीठ थपथपाया करते थे, अब पीएम की पीठ पर तवा रखकर वोटों की रोटी सेंकने से गुरेज़ नहीं करते। बस सीएम साहब को मौक़े की तलाश रहती है कि कब पीएम की दहकती पीठ पर तवा रखें।

सीएम साहब के सूबे में चुनाव होने जा रहे हैं। यहाँ की जनता तवे की रोटी पलटने के मूड दिख रही है। जिससे घबराकर सीएम साहब पीएम से चुनावी श्रीगणेश कराना चाहते हैं और अपने किए-धरे की तारीफ़ करवाना चाहते हैं। वजह साफ़ है सीएम से पीएम का ग्राफ़ बहुत ऊपर है, सीएम फिर से सीएम बने इसका सारा दारोमदार पीएम के ऊपर ही है। अगली बार सीएम बनने की लालसा में जनाब ने चाटुकारिता की नई परिभाषा गढ़ दी। इस नई परिभाषा को उन्होंने अपनी फ़ेसबुक वॉल पर शेयर कर दी। जिस पीएम को वो विश्व का सर्वाधिक लोकप्रिय जननेता बता रहे हैं उन पीएम का ग्राफ़ देश में नीचे की तरफ़ खिसक रहा है। अभी कुछ दिन पहले ही एक अति लोकप्रिय चैनल ने सर्वे दिखाया था। जिसमें देश के 51 फ़ीसदी आबादी पीएम को पीएम के रूप में देखना चाहती है। जबकि पप्पू नामक नेता को 36 प्रतिशत जनता पीएम के पद पर देखने की इच्छा रखती है।पीएम और पप्पू के बीच कुल 15 फ़ीसदी का फ़ासला रह गया है, ऐसे में सीएम साहब की नई परिभाषा बेमानी सी लगती है।