स्टार्स के मैनेजर्स के नखरे स्टार्स से भी ज्यादा

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मुंबई =कई मशहूर टीवी धारावाहिको की निर्माता एकता कपूर ने बॉलिवुड के बड़े-बड़े सितारों के मैनेजर्स को आड़े हाथ लिया। जब एकता से पूछा गया कि छोटे परदे में कामयाबी पाने के बाद फिल्मों की दुनिया में आना कितना मुश्किल और चैलंजिग था? जवाब में एकता ने कहा, ‘छोटे परदे के बाद जब मैंने फिल्म निर्माण में कदम रखा तो मेरे लिए यह समझना मुश्किल हो गया था कि अब यहां मेरा निर्णय नहीं चलेगा। यहां एक डायरेक्टर, लाइन प्रोड्यूसर सहित और भी लोग होंगे, जो निर्णय लेंगे। उसके बाद बड़े ऐक्टर आएंगे जो आपकी बनी-बनाई कहानी या स्क्रिप्ट में फेर-बदल करेंगे, इसलिए मैंने छोटी फिल्मों का निर्माण पहले किया।’एकता बताती हैं, ‘मेरी पहली बड़ी फिल्म थी अजय देवगन स्टारर वंस अपॉन ए मुंबई। इस फिल्म का निर्माण बड़े आराम से हो गया था। अजय देवगन और फिल्म के निर्देशक मिलन लुथरिया एक दूसरे को पहले से जानते थे। ज्यादातर मैंने उन्हीं स्टार्स के साथ काम किया जो मेरे साथ खुद भी काम करना चाहते थे, मेरे काम का सम्मान भी कर रहे थे और ज्यादा रोक-टोक नहीं करते थे। मैं बड़े स्टार्स से इसलिए भी दूर रही क्योंकि मुझे लगता था मैं उनको संभाल नहीं पाऊंगी।’
अपने बुरे अनुभव का एक वाकया बिना किसी का नाम लिए बताते हुए एकता ने कहा, ‘आप जब किसी बड़े स्टार्स के साथ काम करते हैं तो स्टार्स से ज्यादा उनके मैनेजर्स से निपटना मुश्किल होता है। मैनेजर्स के कारण एक बड़े स्टार्स के पीछे पांच सितारा हॉटेल में करीब 12 रूम बुक होते हैं। हम लोग, जो टीवी की दुनिया से आए हैं और एक रूम में 12 लोगों की जगह बनाते हैं, इन 12 लोगों में खुद भी होते हो, अचानक इस तरह का बजट बढ़ना, बहुत बड़ा शॉक होता है।’
वैसे बॉलिवुड में यह शिकायत बेहद आम हो गई है। कई निर्माता जब इस तरह के अनाप-शनाप खर्चों की शिकायत करते हैं तो मैनेजर्स सितारों के कान भर देते हैं। पिछले दिनों हमसे हुई खास बातचीत में अभिनेता जॉन अब्राहम ने भी यह बात की थी। जॉन की मानें तो वह अपनी टीम में एक से ज्यादा लोग को नहीं रखते। वह अलग से अपने लिए स्पॉट बॉय भी नहीं मांगते। जॉन अपनी गाड़ी भी खुद ही चलाते हैं, ताकि ड्राइवर का खर्च भी बचा सकें। जॉन का मानना है कि कई बार फिल्म का बजट इस तरह के फालतू खर्चों की वजह से भी बढ़ जाता है।