क्या राहुल गांधी सूबेदारों में सामंजस्य बना पाये ………

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आनंद खरे

भोपा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राहुल गांधी की बीेते दिन राजधानी भोपाल में आयोजित रोड शो व संकल्प रैली सफल रही ऐसा कांग्रेस जनों का दावा है इस आयोजन के बाद अनेक क्षेत्रों के खेमों में बटी कांग्रेस क्या एक सूत्र में खड़ी दिखेगी। ये सवाल अभी भी सामने खड़ा हुआ है
म0प्र0 कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ पूर्व केंद्रीय मंत्री सासंद ज्योतिरादित्य सिंधिया भूतपूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरश पचैरी म.प्र. विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह पूर्व म0प्र0 कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव सहित कुछ अन्य नामचीन कांग्रेस नेता अपने अपने इलाके में अच्छा खासा प्रभाव रखते है म0प्र0 विधान सभा निर्वाचन की तारिखों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। बीते 15 सालों से विपक्ष में बेठी कंग्रेस क्या चुनावी किला फतह करने के लिये एक पंक्ति में खड़ी दिखाई देगी। कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की संकल्प रैली रोड शो कांग्रेस जनों में नई उर्जा उत्साह संचार कर पायी हैइसका असर आने वाले दिनों में दिखेगा। वैसे भी मध्यप्रदेश राज्य में कांग्रेस का इतिहास गौरवशाली रहा है। कांग्रेस के कददवार नेताओं में मूलतः मुख्य मंत्री पं. रविशंकर शुक्ल कैलाशनाथ काटजू भगवंत राव माडलोई प. द्वारिका प्रसाद मिश्रा पं0 श्यामाचरण शुक्ल प्रकाश चंद्र सेठी अर्जुन सिंह, मोती लाल बोरा एवं पूर्व कंद्रीय मंत्री माधवराव सिंंधया विधायक शुक्ल का समावेश रहा है। उपरोक्त सभी नेताओं का सामयिक स्मरण इसलिय भी किया जाता है। कि उनमें सबको साथ ले चलने की साधने की भूतपूर्व कला है। वर्तमान के स्थापित वरिष्ठ नेताओं को उसी राह पर चलना होगा तब ही वे तैरकर पार होने की संभावना है।
बहरहाल कांग्रेस का भोपाल रैली के बाद कंग्रेस कार्यकर्ता अपने-अपने इलाकों के लिए कूच कर गये है। और वे कैसे राजनैतिक परिदृश्य चित्रित कर पायेगें इस पर निगाहे लगी रहेगी। रणभेरी बज चुकी है। शंखनाद हो चुका है। संघर्ष की इबारत लिखी जा चुकी है। प्रतिक्षा है उस परिवर्तन की जिसके लिये कांग्रेस आशन्वित है। संघर्ष और यह तब ही संभव है जबकि कांग्रेस के सूची सूबदारों में समन्वय सामंजस बन पाये।