क्यों होते हैं एलोपैथी मेडिसिन में साइड इफ़ेक्ट:

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डा. अव्यक्त अग्रवाल

मैंने हज़ारों मरीजों में पेरासिटामोल, cefixime या injection Ceftriaxone जैसी सैकड़ों दवाएं अब तक दी होंगी। लेकिन किसी भी मरीज़ में एक भी साइड इफ़ेक्ट होना मुझे याद नहीं।
तो क्या मैं यह मान कर बैठ जाऊं कि, ये दवाएं साइड इफ़ेक्ट रहित हैं। मेरा मन इस बात को लेकर पूर्णतः आश्वस्त हो सकता है कि , मैंने अपने जीवन में अब तक एक भी साइड इफ़ेक्ट नहीं देखा तो इन दवाओं में कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं। और फिर मैं यह दावा कर सकता हूं अपने मरीजों से , अपने इस व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर।
किंतु… और यह किंतु बहुत बड़ा है मेरे दोस्तों..
एक चिकित्सक का अपने व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित यह दावा पूर्णतः भ्रामक हो सकता है।
अच्छा आप खुद सोचो, आपमें से बहुतों ने पेरासिटामोल खाई होगी , आपके परिवारजनों ने, दोस्तों ने..जीवनकाल में किसी का लिवर इस वजह से खराब होते देखा?
नहीं न….
लेकिन जब आप patacetamol के साइड इफेक्ट्स की लिस्ट पढ़ेंगे तो उसमें आपको लिवर failure भी मिलेगा।
ऐसा इसलिए क्योंकि paracetamol से होने वाले प्रभावों का लाखों मरीजों, लैब, और जानवरों में परीक्षण के बाद कुछ में यह साइड इफ़ेक्ट पाया गया।
और क्योंकि यह साइड इफ़ेक्ट पाया गया कुछ में ही सही, अतः उसे टेबलेट के लीफलेट में लिखना और मरीजों को बताना जरूरी बनाया गया, जिससे उन्हें संभावित साइड इफ़ेक्ट की जानकारी हो। साथ ही दवा के मार्केट में आने के बाद भी उस पर सतत नज़र और हर साइड इफ़ेक्ट की सेंट्रल रिपोर्टिंग का सिस्टम रखा गया जिससे नए संभावित साइड इफ़ेक्ट लिस्ट में बरस दर बरस जुड़ते रहे
Refecoxib जैसी किसी दवा से गंभीर नुकसान कुछ मरीजों को हुआ तो लाखों में यह प्रभावी होने के बावजूद उसे बैन कर दिया गया।
अतः मैं एक चिकत्सक यदि 10000 चिकत्सक में बदल जाऊं तो मुझे पेरासिटामोल में साइड इफ़ेक्ट दिखने लगेंगे।
आप एक मरीज़ लाखों में बदल जायें तो आपको भी दिखने लगेंगे ।
तो दोस्तों समझ आया ? मॉडर्न मेडिसिन जो कि Evidence Based है में साइड इफ़ेक्ट का डर आपको इसलिए लगता है क्योंकि संभावित साइड इफ़ेक्ट आपको बताया जाता है… बनिस्पत इस दावे के कि, “मैंने इस दवा का हज़ारों बार उपयोग किया बिना साइड इफ़ेक्ट के इसलिए यह पूर्ण सुरक्षित है।”
फिर इस तरह आपको इन ‘अंग्रेज़ी दवाओं’ के संभावित साइड इफ़ेक्ट की पूर्वधारणा की वजह से कुछ मनोवैज्ञानिक साइड इफ़ेक्ट जैसे दवा ‘गर्म तो नहीं’ भी दिखने लगते हैं।
अब हम आते हैं किसी भी दूसरी चिकत्सा पद्धति में क्या बिना साइड इफ़ेक्ट की संभावना के इलाज़ संभव है?
तो इसका उत्तर आप लोग ही देना, कुछ वैज्ञानिक तथ्यों को जानने के बाद।
दुनिया के किसी भी , तत्व को आप लें, यदि शरीर के भीतर उसका प्रभाव है तो यह केमिस्ट्री , बायोलॉजी, जेनेटिक्स के मूलभूत नियमों के विरुद्ध है कि उसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा।दवाओं की बात अभी कुछ देर छोड़ते हैं..
आपको पता है जो जीवनदायिनी ऑक्सीजन आप रोज लेते हैं उससे निकले फ्री रैडिकल आपको रोज़ाना बूढ़ा बना रहे हैं। त्वचा, बाल, अंदरूनी अंग सभी को और आपको मृत्यु की ओर ले जा रहे हैं।
नवजात शिशु जो ऑक्सीजन पर होते हैं उन्हें अंधत्व हो सकता है ‘Retinopathy of Prematurity’ की वजह से।
दूध जो आप लेते हैं उससे लाखों लोगों को मिल्क एलर्जी होती है।
मूंगफली, मशरूम के सेवन से anaphylaxis से प्रतिवर्ष हज़ारों लोग मरते हैं।
चलिए छोड़िए इन्हें, galactosemia जैसी बीमारियों में अमृत तुल्य माँ का दूध तक ज़हर साबित हो सकता है शिशु के लिए।
गेंहू से celiac डिजीज नामक गंभीर, रेयर बीमारी बच्चों को हो सकती है।लाखों लोग पानी जनित रोगों से भर्ती होते हैं। मृत्यु तक हो जाती है।
मेरे यह बताने के पहले आपको नहीं पता होगा पढ़ते पढ़ते ऑक्सीजन नामक sideeffect वाला तत्व बिना इस अहसास के आप लेते चले गए हैं कि, यह आपको बूढ़ा बनाएगा।
तो समझ आया आपको कि, यदि शरीर में किसी भी चीज़ का प्रभाव है तो दुष्प्रभाव की संभावना अवश्य होगी। हां आपने लाखों लोगों का डेटा नहीं लिया, हर प्रभाव को रिकॉर्ड नहीं किया शोध के रूप में तब आपको वह बिना साइड इफ़ेक्ट का तत्व लग सकता है।
और क्योंकि आपने अपनी इस भ्रामक धारणा को मरीजों को भी बताया, इसलिए मरीजों में यह भ्रम घर कर जाएगा एक विश्वास के रूप में क़ि इससे कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होते।
अतः इस तरह के बिना Double Blind Trial (शोध की एक सर्वमान्य प्रक्रिया जिसमें मरीज़ और चिकत्सक दोनों को न पता हो कि किस मरीज़ में वह दवा दे रहा है , किसमें प्लेसिबो) की धारणाओं की वजह से मरीजों का तो नुकसान होगा ही उस पद्धति से जुड़े Qualified Professionals का भी नुकसान होगा। बताता हूँ कैसे?…
आज एक एलोपैथी चिकत्सक के पास paracetamol जैसी दवा लिखा लेने के लिए भी लोग घंटों इंतजार करके , फी देकर बैठे रहते हैं।
जबकि अन्य पद्धतियों में टीवी, अखबार, youtube, पड़ोसी से पूछ पूछ दवा खाते रहते हैं, उनके चिकित्सकों को न दिखाने की वजह से। क्योंकि उन्हें लगता है ऐसा करना पूर्ण सुरक्षित है।अतः इस भ्रम का लाभ बड़ी कंपनियों को तो मिलता है लेकिन उस पद्धति के चिकित्सकों को समुचित सम्मान और काम मिलना कठिन हो जाता है।और मरीज़ तो भ्रम में है ही।
कोई दुष्प्रभाव न होने की संभावना तभी है दोस्तों जब, कोई प्रभाव ही न हो।
क्योंकि दवा का काम ही है शरीर के भीतर जा कर कुछ न कुछ बदलाव लाना। जो कुछ भी चल रहा है उसे बदलना।
ऐसे में इस जटिल शरीर मे कुछ बदलाव हमारी चाहत के न हों यह हमेशा संभव है।